केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश भर के रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी प्राप्त करने से जुड़े नियमों में एक बड़ा और पारदर्शी बदलाव किया है। 1 अक्टूबर से बिना आधार बायोमेट्रिक या ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण कराए घरेलू एलपीजी सिलेंडरों पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
नए नियमों के अनुसार, जिन परिवारों ने अपने गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की होगी, उन्हें केवल बाजार मूल्य (Non-subsidised Market Price) पर ही एलपीजी रिफिल दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ऐसे गैर-केवाईसी वाले उपभोक्ताओं को मानक 14.2 किग्रा का सिलेंडर न देकर केवल छोटे 5 किग्रा या 10 किग्रा के रिफिल सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
सरकार का यह कदम एलपीजी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने, फर्जी या बेनामी कनेक्शनों को समाप्त करने और सब्सिडी की चोरी रोकने के लिए उठाया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि टैक्सपेयर्स के पैसे से दी जाने वाली सब्सिडी का वास्तविक लाभ केवल योग्य और गरीब परिवारों तक ही पहुंचे।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने अपनी एजेंसियों और डिलीवरी बॉयज को घर-घर जाकर मोबाइल ऐप के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन करने का काम सौंपा है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर रिफिल बुकिंग के न्यूनतम अंतर को भी 25 दिनों पर तय कर दिया गया है ताकि कालाबाज़ारी रोकी जा सके।
इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर देश के करोड़ों घरेलू गैस उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सरकार का यह प्रयास सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में लीकेज को पूरी तरह खत्म करने और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का एक बड़ा उदाहरण है।