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एफएमसीजी क्षेत्र में बड़ा बदलाव: पैक्ड गुड्स पर 'Veg' और 'Non-Veg' लेबलिंग का नया युग

भारतीय उपभोक्ता बाजार में एक बड़ा और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार ने पैकेज्ड गुड्स (FMCG) से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए यह अनिवार्य करने का कदम उठाया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
22 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारतीय उपभोक्ता बाजार में एक बड़ा और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार ने पैकेज्ड गुड्स (FMCG) से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए यह अनिवार्य करने का कदम उठाया है कि केवल खाद्य पदार्थों पर ही नहीं, बल्कि साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और क्रीम जैसे दैनिक उपयोग के कॉस्मेटिक उत्पादों पर भी 'Veg' (हरा निशान) और 'Non-Veg' (लाल/भूरा निशान) के स्पष्ट लेबल लगाए जाएं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह सटीक जानकारी देना है कि वे जिस उत्पाद का इस्तेमाल अपनी त्वचा, बालों या ओरल केयर के लिए कर रहे हैं, उसमें पशु-आधारित घटक शामिल हैं या नहीं।

सामान्य तौर पर उपभोक्ता यह मानते हैं कि व्यक्तिगत देखभाल (Personal Care) के उत्पाद केवल प्राकृतिक या रासायनिक चीजों से बनते हैं। हालांकि, सच्चाई यह है कि कई साबुन, टूथपेस्ट और सौंदर्य प्रसाधनों में 'स्टेरिक एसिड', 'जिलेटिन', 'ग्लिसरीन', 'लैनोलिन' और 'काइटिन' जैसे अवयव होते हैं, जो अक्सर पशु वसा, हड्डियों या अन्य पशु स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं। अब तक आम ग्राहक के लिए बारीक अक्षरों में लिखी केमिकल सामग्री को पढ़कर यह समझना नामुमकिन होता था कि उत्पाद पूरी तरह शाकाहारी है या नहीं। नए नियमों से अब एक साधारण रंगीन डॉट देखकर ही सच सामने आ जाएगा।

हाल के वर्षों में भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में शाकाहारी, वीगन (Vegan) और अहिंसक जीवनशैली अपनाने वाले लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। लोग अब इस बात को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं कि उनके द्वारा खरीदे जाने वाले सामान से किसी जीव को नुकसान न पहुंचा हो। धार्मिक, नैतिक या व्यक्तिगत कारणों से पशु-आधारित सामग्री से परहेज करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत लेकर आया है। इससे न केवल लोगों की धार्मिक और नैतिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि उन्हें अपने मूल्यों के अनुसार खरीदारी करने का विकल्प मिलेगा।

इस नए नियम के लागू होने से एफएमसीजी और कॉस्मेटिक कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन, कच्चा माल जुटाने की प्रक्रिया और पैकेजिंग में व्यापक बदलाव करने होंगे। कंपनियों को अब अपने हर उत्पाद का पूरा ऑडिट करना होगा ताकि वे सटीक लेबलिंग कर सकें। कई विदेशी ब्रांड्स जो भारत में बड़े पैमाने पर अपने उत्पाद बेचते हैं, उन्हें भी भारतीय बाजार के अनुकूल ढलना होगा। हालांकि शुरुआत में कंपनियों को पैकेजिंग बदलने में अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह पारदर्शिता ब्रांड्स के प्रति ग्राहकों के भरोसे को बढ़ाएगी।

यह नया नियम भारत में उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। 'जानने का अधिकार' (Right to Know) हर ग्राहक का मौलिक अधिकार है, और यह फैसला उस अधिकार को और अधिक व्यापक बनाता है। जब उपभोक्ता को यह स्पष्ट रूप से पता होगा कि उत्पाद में क्या है, तो बाजार में प्रतिस्पर्धा भी अधिक पारदर्शी होगी। भविष्य में यह कदम अन्य उद्योगों को भी अपने उत्पादों में पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे भारतीय बाजार अधिक उपभोक्ता-अनुकूल और जागरूक बनेगा।