बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर स्थित प्रसिद्ध और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु (Vikramshila Setu) की स्थिति को देखते हुए राज्य पथ निर्माण विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। सेतु के जीर्णोद्धार, बियरिंग बदलने और ओवरहालिंग कार्य के चलते 1 अक्टूबर से अगले 3 महीने के लिए इस पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से बंद किया जा रहा है। इस फैसले से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का सड़क संपर्क सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
1901 मीटर लंबा विक्रमशिला सेतु एनएच-80 और एनएच-31 को जोड़ने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी है। वर्षों से अत्यधिक भारी वाहनों के दबाव और रखरखाव की कमी के कारण पुल के कई पाए, जॉइंट्स और बियरिंग्स जर्जर हो चुके थे। कई स्थानों पर कंक्रीट की दरारें और सड़क की सतह के उखड़ने के कारण हादसों की आशंका बनी हुई थी। विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर पुल की मियाद और सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह बड़ा मरम्मत कार्य अनिवार्य हो गया था।
पुल बंद होने के कारण आम जनता और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक डायवर्जन प्लान तैयार किया गया है। भारी मालवाहक वाहनों को मुंगेर में बने नए गंगा पुल (अगुवानी-सुल्तानगंज या मुंगेर रेल-सह-सड़क पुल) और बेगूसराय के रास्ते मोकामा के सिमरिया पुल की ओर डाइवर्ट किया जाएगा। छोटे चार पहिया और दो पहिया वाहनों के लिए समानांतर नाव सेवाओं और वैकल्पिक रूटों की व्यवस्था की जा रही है।
इस लंबे ट्रैफिक डायवर्जन से भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और बांका जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड जाने वाले यात्रियों और व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। सामानों की धुलाई लागत बढ़ने से खाद्यान्न और निर्माण सामग्रियों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की संभावना व्यक्त की जा रही है।
प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने दावा किया है कि तय समयसीमा (3 महीने) के भीतर अत्याधुनिक स्वदेशी और आयातित तकनीकों का उपयोग करके बियरिंग्स को बदल दिया जाएगा। हालांकि यह बंद तात्कालिक रूप से जनता के लिए असुविधाजनक है, लेकिन भविष्य में किसी बड़ी संरचनात्मक दुर्घटना को रोकने और सेतु को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने के लिए यह निर्णय अत्यंत आवश्यक था।