यूएन महासभा में जेलेंस्की का तीखा हमला
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के वार्षिक सत्र के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने विश्व मंच से रूस पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया। जेलेंस्की ने अपने संबोधन में रूसी आक्रमण को केवल यूक्रेन के अस्तित्व पर हमला नहीं, बल्कि पूरे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वैश्विक संप्रभुता के सिद्धांतों पर हमला करार दिया। उन्होंने सबूत पेश करते हुए आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर यूक्रेन के नागरिक बुनियादी ढांचों, ऊर्जा ग्रिडों और रिहाइशी इलाकों को निशाना बना रहा है, जिससे एक भीषण मानवीय संकट पैदा हो गया है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से रूस पर और अधिक कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की।
रूसी सैन्य अभियानों और पश्चिमी सहायता का मुद्दा
जेलेंस्की ने अपने भाषण में अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के देशों से अपील की कि वे यूक्रेन को लंबी दूरी तक मार करने वाली आधुनिक मिसाइलें और वायु रक्षा प्रणालियां (Air Defense Systems) बिना किसी सीमा प्रतिबंध के प्रदान करें। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक यूक्रेन को रूस के अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों को बेअसर करने की अनुमति नहीं मिलती, तब तक इस युद्ध को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन किसी भी ऐसे शांति प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं से समझौता करता हो।
ईरान की अमेरिका और पश्चिमी देशों को खुली चेतावनी
इसी सत्र के दौरान मध्य पूर्व के घटनाक्रमों को लेकर ईरान के प्रतिनिधिमंडल और नेतृत्व ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देश मध्य पूर्व में सैन्य हस्तक्षेप बंद नहीं करते हैं और लाल सागर व फारस की खाड़ी में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाते हैं, तो यह युद्ध हिंद महासागर तक फैल सकता है। ईरान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उसके या उसके सहयोगियों के हितों पर हमला होने की स्थिति में वह किसी भी स्तर का कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।
संयुक्त राष्ट्र की लाचारी और वीटो पावर पर सवाल
यूक्रेन और ईरान के इन बयानों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की विफलता और उसकी संरचनात्मक खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (रूस, अमेरिका आदि) द्वारा अपने-अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किए जाने के कारण कोई भी सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव लागू नहीं हो पा रहा है। विकासशील और तटस्थ देशों (Global South) ने चिंता व्यक्त की है कि महाशक्तियों की इस आपसी लड़ाई के कारण वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ईंधन की कीमतें और आर्थिक स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
वैश्विक सुरक्षा पर मंडराता खतरा और भविष्य का परिदृश्य
यूक्रेन-रूस युद्ध का लंबा खींचना और ईरान-अमेरिका के बीच हिंद महासागर तक युद्ध फैलने की धमकियों ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास जल्द ही रंग नहीं लाते हैं, तो यह स्थानीय संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध में तब्दील हो सकता है। दुनिया भर के बाजार और शेयर सूचकांक इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण लगातार दबाव महसूस कर रहे हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा और गहरा गया है।