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रूस से तेल का आयात बढ़ा सितंबर में रिकॉर्ड क्रूड ऑयल सप्लाई

भारतीय रिफाइनरियों का फैसला और आयात में उछाल पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और मूल्य सीमा (Price Cap) के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात एक बार फिर बढ़ा दिया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
24 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारतीय रिफाइनरियों का फैसला और आयात में उछाल

पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और मूल्य सीमा (Price Cap) के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात एक बार फिर बढ़ा दिया है। उपलब्ध ऊर्जा व्यापार आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से रोजाना औसतन 18 लाख बैरल (1.8 Million bpd) कच्चे तेल का आयात किया है। यह आंकड़ा पिछले दो-तीन महीनों की तुलना में काफी अधिक है और यह दर्शाता है कि रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है।

रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट और आर्थिक लाभ

रूस से कच्चे तेल के आयात में इस उछाल का मुख्य कारण रूसी तेल कंपनियों (जैसे रोसनेफ्ट) द्वारा भारतीय सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और रिलायंस) को दिया जाने वाला आकर्षक डिस्काउंट (छूट) है। हालांकि यह छूट शुरुआती दौर की तुलना में कम हुई है, फिर भी मध्य पूर्व (जैसे सऊदी अरब और इराक) के तेल की तुलना में रूसी क्रूड भारत के लिए काफी किफायती साबित हो रहा है। इससे भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों की इनपुट कॉस्ट कम हुई है और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है।

पश्चिमी देशों का दबाव और भारत का स्वतंत्र रुख

अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) ने लगातार भारत पर रूस से तेल आयात कम करने और रूसी तेल पर पश्चिमी प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाया है। हालांकि, भारत सरकार ने बार-बार अपने स्पष्ट और स्वतंत्र रुख को दोहराया है। विदेश और पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता अपने 1.4 अरब नागरिकों को सस्ती और निर्बाध ऊर्जा प्रदान करना है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाजार दरों के आधार पर सबसे प्रतिस्पर्धी और अनुकूल स्रोतों से तेल खरीदना जारी रखेगा।

भारतीय रिफाइनिंग क्षमता और निर्यात का गणित

रूस से आने वाले कच्चे तेल को भारतीय रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत (Refine) करके न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा रहा है, बल्कि इससे तैयार डीजल और विमान ईंधन (Jet Fuel) का निर्यात यूरोपीय और एशियाई बाजारों में भी किया जा रहा है। इससे भारत एक बड़े वैश्विक रिफाइनिंग हब के रूप में उभरा है। भारतीय कंपनियों को इस पूरी प्रक्रिया से अच्छा खासा रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) मिल रहा है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन को भी मजबूती मिल रही है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति और भुगतान तंत्र

रूस से तेल के निरंतर आयात को सुचारू बनाए रखने के लिए भारत और रूस ने एक मजबूत और वैकल्पिक भुगतान तंत्र (Payment Mechanism) भी विकसित किया है। दोनों देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) और अन्य गैर-पश्चिमी मुद्राओं में व्यापार करने के रास्ते निकाल रहे हैं। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि जब तक रूस से प्रतिस्पर्धी दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध रहेगा, तब तक भारत की ऊर्जा बास्केट में रूसी तेल का दबदबा इसी तरह प्रमुखता से बना रहेगा।