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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $700 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) एक बार फिर इतिहास रचने की ओर अग्रसर है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
24 Sep 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) एक बार फिर इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का कुल मुद्रा भंडार बढ़कर 698.2 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) के अत्यंत करीब पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी झटकों को सहने की अद्भुत क्षमता और विदेशी पूंजी के निरंतर प्रवाह को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस शानदार वृद्धि में मुख्य योगदान 'विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों' (Foreign Currency Assets - FCA) और स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) के मूल्य में हुई बढ़ोतरी का है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई तेजी के कारण आरबीआई के स्वर्ण भंडार के मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके अलावा, भारत के प्रति विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के सकारात्मक दृष्टिकोण से भी डॉलर का प्रवाह बढ़ा है।

एक मजबूत और विशाल विदेशी मुद्रा भंडार देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच (Financial Cushion) के रूप में काम करता है। यह भारतीय रुपये (INR) की विनिमय दर में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में आरबीआई को बड़ी ताकत देता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ती हैं या वैश्विक वित्तीय बाजार में उथल-पुथल मचती है, तो भारत के पास लगभग 11-12 महीनों के आयात का भुगतान करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है।

वैश्विक रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत के इस मजबूत विदेशी मुद्रा प्रबंधन की सराहना की है। कई विकसित और विकासशील देश जहां उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ते कर्ज और घटते मुद्रा भंडार से जूझ रहे हैं, वहीं भारत की यह वित्तीय स्थिरता देश को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आकर्षित करने में मदद करेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की साख (Credit Rating) को मजबूत बनाएगी।

आरबीआई की दूरदर्शी मौद्रिक नीति, सतर्क विनिमय दर प्रबंधन और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास दर (GDP Growth) ने मिलकर भारत को इस वैश्विक वित्तीय मुकाम पर पहुंचाया है। यह उपलब्धि न केवल देश की आर्थिक स्थिरता को पक्का करती है, बल्कि भविष्य के आर्थिक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी एक ठोस आधार प्रदान करती है।