भारत के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला पूरी तरह से संस्कृत भाषा पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) 'संस्कृत-धी' (Sanskrit-Dhee) लॉन्च कर दिया है। सैन फ्रांसिस्को की सिलिकॉन वैली में जब इस एआई मॉडल का लाइव डेमो दिया गया, तो गूगल, ओपन-एआई और माइक्रोसॉफ्ट के शीर्ष टेक दिग्गज खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। इस एआई ने साबित कर दिया कि दुनिया की किसी भी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए संस्कृत ही सबसे अधिक गणितीय और सटीक भाषा है।
दशकों पहले नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र में कहा था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एआई कोडिंग के लिए संस्कृत की व्याकरण संरचना (विशेषकर महर्षि पाणिनि का अष्टाध्यायी) दुनिया की सबसे त्रुटिहीन भाषा है। भारतीय वैज्ञानिकों ने इसी सिद्धांत को धरातल पर उतारते हुए 'संस्कृत-धी' मॉडल तैयार किया है। यह एआई मॉडल बिना किसी एम्बिग्युटी (अस्पष्टता) के जटिल से जटिल लॉजिक, गणितीय समीकरणों और कोडिंग को अन्य भाषाओं की तुलना में 10 गुना तेजी से प्रोसेस करता है।
इस संस्कृत एआई मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत के लाखों प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts), ताड़पत्रों और वेदों में बंद ज्ञान को कुछ सेकंड में डिजिटाइज करके सरल भाषा में अनुवादित कर सकता है। खगोल विज्ञान, गणित, धातु विज्ञान, वास्तुकला और नागरिक शास्त्र के वो अमूल्य ग्रंथ जो सदियों से धूल फांक रहे थे, अब इस एआई के जरिए दुनिया के सामने एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाएंगे।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह उपलब्धि भारत की 'भाषा और तकनीक' की स्वतंत्रता का एक नया अध्याय है। अब तक भारतीय भाषाओं को डिजिटल दुनिया में द्वितीय श्रेणी का दर्जा दिया जाता था और पश्चिमी भाषाओं का ही वर्चस्व था। लेकिन संस्कृत पर आधारित इस एआई क्रांति ने भारत को वैश्विक टेक रेस में सबसे आगे खड़ा कर दिया है। यह भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और भाषा संबंधी स्वाभिमान को अभूतपूर्व बल प्रदान करता है।
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में यह एआई मॉडल क्रांति लाने वाला है। इसके जरिए नई पीढ़ी बेहद आसानी से संस्कृत भाषा सीख सकेगी और भारत के प्राचीन साहित्य से सीधे जुड़ सकेगी। अब संस्कृत केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों की भाषा न रहकर, 21वीं सदी की सबसे एडवांस कंप्यूटर और रोबोटिक्स लैंग्वेज बन चुकी है। इससे भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक टेक कंपनियों में रिसर्च और डेवलपमेंट के नए दरवाजे खुलेंगे।
संक्षेप में कहें तो भारत ने अपनी सबसे प्राचीन भाषा के जरिए दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक पर अपना परचम लहरा दिया है। 'संस्कृत-धी' का यह लॉन्च यह साबित करता है कि भारत का सांस्कृतिक अतीत ही उसके डिजिटल और वैज्ञानिक भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।
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