Cult Current
समाज

इथियोपिया के टिग्रे में युद्ध पुनर्जन्म: अफ़्रीका में फिर बारूद!

पूर्वी अफ़्रीका के सबसे महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाले देश इथियोपिया के 'टिग्रे' (Tigray) क्षेत्र में एक बार फिर से भयानक गृहयुद्ध भड़क उठा है। शांति समझौते के दावों को धत्ता बताते हुए विद्रोही गुटों और इथियोपियाई केंद्रीय सेना के बीच टैंकों और भारी तोपखाने से भीषण जंग शुरू हो गई है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
30 Sep 2026
Solar farm during sunset

पूर्वी अफ़्रीका के सबसे महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाले देश इथियोपिया के 'टिग्रे' (Tigray) क्षेत्र में एक बार फिर से भयानक गृहयुद्ध भड़क उठा है। शांति समझौते के दावों को धत्ता बताते हुए विद्रोही गुटों और इथियोपियाई केंद्रीय सेना के बीच टैंकों और भारी तोपखाने से भीषण जंग शुरू हो गई है। हॉर्न ऑफ अफ़्रीका में अचानक भड़की इस खूनी हिंसा के कारण हजारों शरणार्थी एक बार फिर पड़ोसी देश सूडान की सीमाओं की ओर भागने लगे हैं, जिससे अफ़्रीका के इस कोने में एक भयानक मानवीय संकट खड़ा हो गया है।  

इस गृहयुद्ध के पीछे का मुख्य कारण इथियोपियाई सरकार द्वारा क्षेत्रीय सशस्त्र गुटों को निरस्त (Disarm) करने का असफल प्रयास है। टिग्रे के लड़ाकों ने आरोप लगाया है कि अदीस अबाबा सरकार उनके क्षेत्रीय अधिकारों और संप्रभुता को कुचलने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही इथियोपिया का अपने पड़ोसी देश सोमालिया और इरिट्रिया के साथ जारी बंदरगाह विवाद ने इस पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है, लेकिन दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि टिग्रे में इस युद्ध के दोबारा शुरू होने से पूरे हॉर्न ऑफ अफ़्रीका की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। यह क्षेत्र लाल सागर और बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग से सटा हुआ है, जहाँ पहले से ही हुथी हमलों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है। यदि इथियोपिया जैसा बड़ा देश गृहयुद्ध की आग में पूरी तरह भस्म होता है, तो वैश्विक समुद्री व्यापार पर इसका बेहद घातक असर पड़ेगा।  

भारतीय परिप्रेक्ष्य में इथियोपिया का यह गृहयुद्ध भारत के आर्थिक और कूटनीतिक निवेश के लिए एक बड़ा झटका है। भारत इथियोपिया में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक है, जहाँ भारतीय कंपनियों ने कृषि, टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों में अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है। इस हिंसा के कारण भारतीय कारखानों और वहाँ काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।  

इसके अलावा, भारत का 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' का विज़न अफ़्रीकी देशों में शांति और विकास पर आधारित है। इथियोपिया में अस्थिरता फैलने से भारत द्वारा समर्थित बुनियादी ढांचा और व्यापारिक योजनाएं ठप पड़ सकती हैं। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय अब अदीस अबाबा स्थित अपने दूतावास के जरिए स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए बैक-चैनल कूटनीति का सहारा ले रहे हैं।

यह गृहयुद्ध साबित करता है कि अफ़्रीकी महाद्वीप में शांति अभी भी कितनी नाजुक है। भारत को अफ़्रीकी संघ (African Union) के साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी होगी, ताकि उसके आर्थिक हित सुरक्षित रह सकें। अगर यह जंग लंबी खिंचती है, तो पूरे हॉर्न ऑफ अफ़्रीका का सुरक्षा संतुलन हमेशा के लिए बिगड़ सकता है।  

#EthiopiaCivilWar #TigrayCrisis #HornOfAfrica #GlobalHumanitarianCrisis #IndiaAfricaRelations #IndianInvestments #Geopolitics2026 #BreakingNews