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कीव ऊर्जा ग्रिड पर बड़ा मिसाइल हमला

सर्दी की दस्तक के साथ ही पूर्वी यूरोप के युद्धक्षेत्र में तबाही का नया मंजर देखने को मिल रहा है। आज सुबह राजधानी कीव और आसपास के प्रमुख इलाकों पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
07 Oct 2026
Solar farm during sunset

सर्दी की दस्तक के साथ ही पूर्वी यूरोप के युद्धक्षेत्र में तबाही का नया मंजर देखने को मिल रहा है। आज सुबह राजधानी कीव और आसपास के प्रमुख इलाकों पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का मुख्य निशाना देश का पावर ग्रिड, बिजली सब-स्टेशन और रेलवे व परिवहन नेटवर्क थे। दर्जनों मिसाइल हमलों के कारण कीव के बड़े हिस्से में बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।  

भीषण ठंड की शुरुआत में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से मानवीय संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। ऊर्जा मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा इन हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ है। अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को बैकअप डीजल जनरेटरों पर स्थानांतरित करना पड़ा है। इस बिजली संकट के कारण औद्योगिक उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर यह समन्वित हमला दुश्मन के नागरिक ढांचे को पंगु बनाकर उसकी आर्थिक और रणनीतिक क्षमता को तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है। पश्चिमी देशों ने तुरंत अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों और जनरेटरों की नई खेप भेजने का आश्वासन दिया है, लेकिन नुकसान इतना व्यापक है कि मरम्मत में हफ्तों का समय लग सकता है।  

भारतीय परिप्रेक्ष्य से यह घटना हमारे रक्षा आयात और द्विपक्षीय व्यापार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। भारत की कई सैन्य प्रणालियों, विशेष रूप से नौसैनिक जहाजों के गैस टर्बाइन इंजन और एएन-32 परिवहन विमानों के स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति इस क्षेत्र के तकनीकी कारखानों से जुड़ी रही है। बिजली और औद्योगिक ढांचे के तबाह होने से इन रक्षा कलपुर्जों की डिलीवरी में भारी देरी होना तय है।

इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्रीय युद्ध के गहराने से वैश्विक ईंधन बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, जिससे भारत का आयात बिल प्रभावित होता है। भारत ने हमेशा इस संघर्ष में शांति और संवाद का पक्ष लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार हर मंच पर यह स्पष्ट किया है कि यह युग युद्ध का नहीं है और नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकते।

इस घटना का ठोस निष्कर्ष यह है कि भारत को अपने रक्षा उपकरणों के पुर्जों के लिए विदेशी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना होगा। 'स्वदेशीकरण' ही एकमात्र रास्ता है जो भारत को ऐसे अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय अपनी सैन्य तैयारियों को बिना किसी बाधा के बनाए रखने की गारंटी देता है।

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