सऊदी अरब की राजधानी रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट मिसाइल धमाकों से थर्रा उठा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने लगातार तीसरे दिन सऊदी अरब के मुख्य हवाई अड्डों को निशाना बनाते हुए अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। टर्मिनलों के पास हुए जोरदार धमाकों में भारी नुकसान की खबर है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है। अमेरिकी एयरलाइंस समेत दुनिया की प्रमुख एयरलाइंस ने रियाद के लिए अपनी सेवाएं रद्द कर दी हैं।
इस सनसनीखेज हमले का सबसे दुखद पहलू यह है कि हूती मिसाइल स्ट्राइक में मारे गए लोगों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक भारतीय की खबर आते ही गल्फ में काम कर रहे लाखों भारतीय प्रवासियों और उनके परिजनों में दहशत की लहर दौड़ गई है। सऊदी अरब में करीब 26 लाख से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं, और रियाद जैसे सुरक्षित समझे जाने वाले शहर पर ऐसा भीषण हमला उनके जीवन पर सीधे खतरे की घंटी है।
इस हमले ने मध्य पूर्व की पूरी बाजी पलट कर रख दी है। अमेरिकी रणनीतिकार और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा एजेंसियां इस बात से हैरान हैं कि हूती विद्रोहियों के पास इतनी सटीक और दूर तक मार करने वाली मिसाइलें कहाँ से आ रही हैं। रियाद के अलावा दम्माम के किंग फहद एयरपोर्ट पर भी हमले की खबर है। इसके जवाब में रॉयल सऊदी एयरफोर्स ने यमन की राजधानी साना में जवाबी एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है, जिससे युद्ध का दायरा बेकाबू होता दिख रहा है।
भारत के नजरिए से यह हमला केवल एक नागरिक की मौत या फ्लाइट्स रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) का मामला है। भारत को हर साल अरबों डॉलर का राजस्व खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों से मिलता है। यदि रियाद और दम्माम जैसे औद्योगिक केंद्र युद्ध की चपेट में आते हैं, तो बड़े पैमाने पर भारतीयों की वतन वापसी हो सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन जाएगा।
इसके साथ ही उमराह और पवित्र यात्राओं पर गए हजारों भारतीय श्रद्धालुओं की यात्रा भी रुक गई है। सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा में आई इस सेंध ने लाल सागर से लेकर अरब सागर तक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारतीय नौसेना को अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अरब सागर में गश्त बढ़ानी पड़ी है, क्योंकि रियाद पर हुए इन हमलों के तार सीधे ईरान और लाल सागर के समुद्री डाकुओं से जुड़े माने जा रहे हैं।
साफ है कि मध्य पूर्व का यह नया मोर्चा अब सऊदी अरब के आर्थिक ठिकानों को सीधा निशाना बना रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने नागरिकों को सुरक्षित रखना और खाड़ी में स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करना है। आने वाले दिन बताएंगे कि क्या रियाद पर हुआ यह प्रहार पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक न न रुकने वाले महायुद्ध में धकेल देगा।
साभार:- Aljazeera
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