वास्तुकला, स्थापत्य कला और शहरी डिजाइन जगत से जुड़ी आज की सबसे बड़ी और वैश्विक खबर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से आई है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने देश की ऐतिहासिक स्थापत्य विरासतों और आधुनिक टिकाऊ वास्तुकला के अभूतपूर्व संगम का जश्न मनाने के लिए 'इण्डिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन बीनाले' (IAADB) के विस्तृत राष्ट्रीय खाके और तिथियों की घोषणा की है।
इस विशाल वास्तुकला महा-उत्सव के तहत देश की राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों—जैसे पुराना किला, सुंदर नर्सरी, अग्रसेन की बाओली और जमाली-कमाली परिसर—में भारत और दुनिया के शीर्ष वास्तुकारों (Architects), डिजाइनरों और नगर-नियोजकों के स्थापत्य मॉडल और कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी।
भारतीय वास्तु और स्थापत्य परिप्रेक्ष्य में यह आयोजन भारत की प्राचीन निर्माण शैलियों (वैदिक, द्रविड़, नागर और मुगलकालीन इंजीनियरिंग) का आधुनिक ईको-फ्रेंडली वास्तुकला के साथ अनोखा समागम प्रस्तुत करता है। भारत की इस वास्तु क्रांति ने वैश्विक पटल पर दुनिया भर के वास्तुकला विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
स्थापत्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीनाले केवल पुरानी इमारतों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के इस दौर में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण (Green Architecture) के नए भारतीय मॉडल दुनिया के सामने पेश कर रहा है।
प्रदर्शनी में पारंपरिक भारतीय निर्माण सामग्रियों—जैसे चूना, पत्थर, मिट्टी और बांस—के आधुनिक उपयोग को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि हमारी प्राचीन स्थापत्य कला आधुनिक शून्य-कार्बन उत्सर्जक इमारतों के निर्माण में कितनी कारगर सिद्ध हो सकती है।
यह विशाल वास्तु महा-कुंभ यह साबित करता है कि भारत अपनी महान स्थापत्य परंपराओं पर गर्व करते हुए 21वीं सदी की आधुनिक और सतत निर्माण तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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