देश की आर्थिक प्रगति और डिजिटल विनिर्माण के क्षेत्र से आज गुजरात के धोलेरा से एक बहुप्रतीक्षित और सनसनीखेज औद्योगिक खबर सामने आई है। भारत के पहले पूर्ण विकसित 'कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट' (Semiconductor Fab Plant) में आज से सिलिकॉन वेफर और माइक्रोकंट्रोलर चिप्स का व्यावसायिक उत्पादन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी के संयुक्त प्रयास से ₹91,000 करोड़ की लागत से तैयार यह प्लांट हर महीने लाखों माइक्रोचिप्स का निर्माण करेगा।
भारतीय आर्थिक परिप्रेक्ष्य में यह क्षण भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का नया केंद्र बनाने की दिशा में सबसे बड़ा मोड़ है। अब तक भारत को अपनी ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, डिफेंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए पूरी तरह विदेशी सेमीकंडक्टरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
इस स्वदेशी चिप उत्पादन से देश में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कारें और मेडिकल उपकरण काफी सस्ते हो जाएंगे, साथ ही विदेशी मुद्रा की भी भारी बचत होगी।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि धोलेरा 'भारत की सिलिकॉन वैली' के रूप में उभर रहा है, जहाँ इस प्लांट के आसपास दर्जनों सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) के आने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50,000 से अधिक नए रोजगार पैदा हो रहे हैं।
यह ऐतिहासिक औद्योगिक क्रांति यह साबित करती है कि भारत अब दुनिया का सेमीकंडक्टर हब बनने जा रहा है और एआई (AI) के इस युग में अपनी तकनीकी संप्रभुता को पूरी तरह सुरक्षित कर चुका है।
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