देश के रक्षा विनिर्माण और 'मेक इन इंडिया' अभियान से जुड़ी आज की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक व्यापारिक-सामरिक खबर नई दिल्ली और लंदन से आई है। भारत और ब्रिटेन ने भारतीय वायुसेना के 5वीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए 110 किलोन्यूटन क्षमता वाले जेट इंजन के सह-विकास और शत-प्रतिशत तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
इस अरबों डॉलर के रणनीतिक समझौते के तहत ब्रिटेन की दिग्गज एरो-इंजन कंपनी रोल्स-रॉयस भारत के डीआरडीओ (DRDO) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर भारत में ही इन शक्तिशाली जेट इंजनों का निर्माण करेगी।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह समझौता देश के एयरोस्पेस इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। अब तक भारत को फाइटर जेट इंजनों के लिए विदेशी मुल्कों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस सौदे से भारत खुद जेट इंजन बनाने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा।
आर्थिक मोर्चे पर, इस रक्षा सौदे से देश के एयरोस्पेस एमएसएमई (MSME) सेक्टर को अरबों रुपये के आर्डर मिलेंगे, जिससे रक्षा उद्योग में हजारों उच्च-कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए नए रोजगार पैदा होंगे।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से यह समझौता दर्शाता है कि भारत-यूके रक्षा संबंध अब एक नई रणनीतिक ऊंचाई पर पहुँच चुके हैं, जो पश्चिमी देशों के साथ भारत की बराबरी की साझेदारी को सिद्ध करता है।
यह ऐतिहासिक रक्षा डील यह साबित करती है कि भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि दुनिया के साथ मिलकर अत्याधुनिक तकनीकों का सह-उत्पादक बन रहा है।
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