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भारत-ऑस्ट्रेलिया डिजिटल व्यापार

अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कूटनीति और वैश्विक आर्थिक सहयोग के मोर्चे से आज नई दिल्ली और कैनबरा से एक बेहद सनसनीखेज और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार समझौते को विस्तार देते हुए एक

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
04 Nov 2026
Solar farm during sunset

अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कूटनीति और वैश्विक आर्थिक सहयोग के मोर्चे से आज नई दिल्ली और कैनबरा से एक बेहद सनसनीखेज और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार समझौते को विस्तार देते हुए एक नए 'ऐतिहासिक डिजिटल और क्रिटिकल मिनरल ट्रेड पैक्ट' (Digital & Critical Minerals Trade Pact) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं।

इस समझौते के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर निर्माण, लिथियम और रेयर-अर्थ मिनरल्स (Rare-Earth Minerals) की निर्बाध आपूर्ति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके साथ ही भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों के लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में प्रवेश और टैक्स रियायतों के नए रास्ते खुल गए हैं।

भारतीय आर्थिक और भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की आर्थिक और खनिज एकाधिकार नीति (Monopoly) को मात देने की दिशा में एक बहुत बड़ा रणनीतिक कदम है। भारत को ग्रीन एनर्जी संक्रमण और ईवी (EV) बैटरी निर्माण के लिए जिन क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता है, वे अब ऑस्ट्रेलिया से आसानी से और रियायती दरों पर मिल सकेंगे।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अगले दो वर्षों में दोगुना होकर $50 अरब के पार पहुँच जाएगा, जिससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अभूतपूर्व बल मिलेगा।

यह कूटनीतिक और आर्थिक सफलता यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अत्यंत विश्वसनीय, सुरक्षित और मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है।

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