ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह 'ब्रिक्स' (BRICS) के आगामी शिखर सम्मेलन से ठीक पहले चीन के राजनीतिक और सैन्य गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर बड़ा प्रशासनिक और सैन्य फेरबदल करते हुए कई शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिराई है। खास बात यह है कि जिन सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई या तबादले की खबरें हैं, उनमें से कई 2020 के भारत-चीन सीमा पर हुए 'गलवान घाटी गतिरोध' (Galwan Valley Clash) से सीधे तौर पर जुड़े रहे हैं।
यह फेरबदल चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और सैन्य पुनर्गठन के नाम पर किया जा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गलवान गतिरोध के दौरान पीएलए को मिले करारे जवाब और भारतीय सेना के कड़े प्रतिरोध के कारण चीनी शीर्ष नेतृत्व के भीतर असंतोष था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी सेना की कार्यकुशलता, वफादारी और कमान संरचना पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के लिए यह कठोर कदम उठा रहे हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम को बेहद अहम माना जा रहा है। ब्रिक्स मंच पर भारत और चीन दोनों ही देश आमने-सामने होंगे, जहां पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। ऐसे में सीमा विवाद से जुड़े सैन्य जनरलों पर कार्रवाई करके चीन संभवतः यह संदेश देना चाहता है कि वह अपनी सेना के भीतर अनुशासनहीनता या रणनीतिक विफलताओं को बर्दाश्त नहीं करेगा।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के भीतर सत्ता के संतुलन और पीएलए की वेस्टर्न थियेटर कमांड (जो भारत की सीमा की देखरेख करती है) में यह बदलाव भारत-चीन सीमा स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है। भारतीय रक्षा विशेषज्ञ इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। नया सैन्य नेतृत्व वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर क्या रुख अपनाता है, यह देखने योग्य होगा।
निष्कर्षतः, ब्रिक्स सम्मेलन की दहलीज पर शी जिनपिंग का यह बड़ा सैन्य कदम चीन की आंतरिक राजनीति और उसकी विदेश नीति दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है। यह न केवल पीएलए के भीतर जिनपिंग की पकड़ को और मजबूत करता है, बल्कि सीमा प्रबंधन को लेकर चीन की भावी रणनीति का भी संकेत देता है।