अमेरिका में 'फ्लॉक' (Flock) कंपनी द्वारा लगाए गए स्वचालित नंबर प्लेट रीडर और निगरानी कैमरों के नेटवर्क का पुलिस अधिकारियों द्वारा दुरुपयोग किए जाने और एक अधिकारी द्वारा अपनी पूर्व महिला साथी की जासूसी करने का मामला सामने आने के बाद कंपनी के सीईओ को माफी मांगनी पड़ी है। पूरे अमेरिका में इस जन-निगरानी (Mass Surveillance) के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है।
2017 में स्थापित, फ्लॉक कंपनी अपने ग्राहकों को लाइसेंस प्लेट रीडर, वीडियो कैमरे और ऑडियो डिटेक्शन उपकरण बेचने के साथ-साथ पुलिस को इस नेटवर्क तक पहुँच प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार, इसके तकनीक से हर हफ्ते 2,800 से अधिक अपराध हल होते हैं। हालाँकि, निजता के हनन और डेटा के दुरुपयोग ने आम जनता को भड़का दिया है।
मई 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सास के अधिकारियों ने गर्भपात कराने वाली एक महिला को ट्रैक करने के लिए फ्लॉक के कैमरों का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा, लॉस एंजिल्स पुलिस विभाग ने भी नागरिक स्वतंत्रता और निजता संबंधी चिंताओं के कारण फ्लॉक के साथ अपना अनुबंध नवीनीकृत न करने का फैसला किया है। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी इन कैमरों को निष्क्रिय या नष्ट कर रहे हैं।
क्या भारत भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहा है?
भारतीय शहरों में भी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए AI-संचालित कैमरों का प्रयोग बढ़ रहा है। हालाँकि भारत में यह व्यवस्था अभी बिखरी हुई है, लेकिन नागरिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा AI-संचालित निगरानी वैन और स्मार्ट चश्मों के उपयोग को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। अनुचित तरीके से चेहरे की पहचान (Facial Recognition) के डेटा का उपयोग एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।