जॉर्जिया मेलोनी : दरकता तिलिस्म
मनोज कुमार
| 02 Apr 2026 |
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रोम की सात पहाड़ियों पर जब सूरज ढलता है, तो प्राचीन खंडहरों की परछाइयां लंबी होने लगती हैं। साल 2022 में जब जॉर्जिया मेलोनी सत्ता के गलियारों में दाखिल हुई थीं, तो उनके कदम किसी रोमन विजेता की तरह थे। उनके चारों ओर 'अजेयता' का एक ऐसा प्रभामंडल था, जिसने यूरोप के सबसे पुराने और चतुर राजनेताओं को भी अचंभित कर दिया था । वे 'ब्रदर्स ऑफ इटली' की मशाल थामे हुए एक ऐसी नायिका थीं, जिसे लगा था कि उन्होंने नियति को अपने वश में कर लिया है। लेकिन राजनीति का मंच किसी ओपेरा जैसा होता है—तालियों की गड़गड़ाहट और सन्नाटे के बीच की दूरी बहुत कम होती है।
23 मार्च 2026 की वो रात, जब इटली के आसमान में बादलों का डेरा था। मेलोनी ने एक दांव खेला था—न्याय प्रणाली में बदलाव का एक 'मामूली' जनमत संग्रह। इसे उनके विधायी एजेंडे का 'फ्लैगशिप' या सबसे बड़ा जहाज कहा जा रहा था । उन्हें उम्मीद थी कि जनता इस जहाज को किनारे लगाएगी, लेकिन विपक्ष की नेता एली श्लेन ने इसे मेलोनी के खिलाफ 'विश्वास मत' के युद्धक्षेत्र में बदल दिया ।
जब नतीजे आए, तो वे किसी ठंडी बौछार की तरह थे। 54% बनाम 46%। इटली की जनता ने मेलोनी के 'न्यायिक सुधारों' को नहीं, बल्कि उनके अहंकार को खारिज कर दिया था । 59% का भारी मतदान इस बात का गवाह था कि जनता सोई नहीं थी, बल्कि जागकर अपनी नाराजगी की इबारत लिख रही थी ।
मेलोनी की सरकार 1945 के बाद से इटली की तीसरी सबसे लंबी चलने वाली सरकार रही है । लेकिन यह स्थिरता अब एक 'खामोश पिंजरा' महसूस होने लगी थी। वे कट्टरपंथ के किनारों को तराश कर खुद को 'सम्मानित मध्यमार्गी' दिखाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने अपना वो मूल आकर्षण खो दिया जो उन्हें आम जनता से जोड़ता था ।
दरअसल, मेलोनी उस अभिनेत्री की तरह थीं जिसने अपनी स्क्रिप्ट तो बदल ली, लेकिन दर्शक अभी भी पुराने चेहरे की तलाश में थे। डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी नजदीकी, जो कभी उनकी ताकत थी, अब ईरान युद्ध के साये में एक बोझ बन गई थी । अर्थव्यवस्था, जिसे यूरोपीय संघ के रिकवरी फंड की संजीवनी मिली थी, फिर भी सुस्त पड़ी थी और न्यायपालिका की सुस्ती किसी दलदल की तरह बढ़ती जा रही थी ।
जब जहाज डूबने लगता है, तो मल्लाह बलि का बकरा ढूंढते हैं। मेलोनी ने अपनी पर्यटन मंत्री डेनिएला सैंटांचे से इस्तीफा लिया, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों और स्कैंडलों की गूंज को वो नहीं दबा पाईं । उनके गठबंधन में दरारें अब उन प्राचीन दरारों जैसी दिखने लगी थीं जो कोलोसियम की दीवारों पर वक्त ने उकेरी हैं ।
मेलोनी का वो जादुई प्रभामंडल अब धुंधला चुका है। उन्होंने उम्मीद की थी कि इस जीत के बाद वे संविधान बदलेंगी और प्रधानमंत्री की शक्तियों को असीमित कर देंगी । लेकिन अब, 2027 के चुनावों की आहट उनके लिए किसी डरावने सपने जैसी है। इटली के मतदाता, जो अपने 1948 के संविधान को किसी पवित्र धर्मग्रंथ की तरह पूजते हैं, उन्होंने मेलोनी को याद दिला दिया कि लोकतंत्र में 'राज' किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि 'जन' का होता है ।
मेलोनी अपने भव्य कार्यालय की खिड़की से रोम की सड़कों को देखती हैं। रोशनी अभी भी है, लेकिन वो चमक गायब है। वो अजेय जॉर्जिया, जो कभी तूफानों की सवारी करती थी, आज खुद एक लहर के थपेड़े से सहमी खड़ी है। इटली की गलियों में अब एक नई गूंज है— 'चमक अब फीकी पड़ रही है।'