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BRICS Summit 2026: दिल्ली घोषणापत्र और नए वैश्विक संतुलन का आगाज़

भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का पहला ही दिन कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ। नई दिल्ली में जुटे सदस्य देशों के प्रमुखों ने गहन विचार-विमर्श के बाद 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026

कल्ट करंट डेस्क
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12 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का पहला ही दिन कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ। नई दिल्ली में जुटे सदस्य देशों के प्रमुखों ने गहन विचार-विमर्श के बाद 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026' पर अपनी सर्वसम्मति की मुहर लगा दी। इस घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना और बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) की नींव को और मजबूत करना है।

इस घोषणापत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पश्चिमी देशों के आर्थिक वर्चस्व को चुनौती देने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की गई है। सदस्य देशों ने आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की है। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और विकासशील देशों को विनिमय दर के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी।

शिखर सम्मेलन में केवल आर्थिक मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि वैश्विक शासन सुधारों पर भी जोर दिया गया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक में तत्काल सुधार की वकालत की। घोषणापत्र में इस बात को रेखांकित किया गया कि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं का वर्तमान स्वरूप अप्रासंगिक होता जा रहा है।

ग्लोबल साउथ (Global South) के लिए यह शिखर सम्मेलन एक आशा की किरण बनकर उभरा है। भोजन, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर ब्रिक्स देशों ने एक साझा मंच तैयार किया है। इस घोषणापत्र के जरिए विकासशील देशों को यह संदेश दिया गया है कि वे अब वैश्विक निर्णयों में दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

अंततः, 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026' ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की मध्यस्थ और नेतृत्व क्षमता को नए आयाम दिए हैं। जहाँ एक ओर पश्चिमी देश गुटबाज़ी में उलझे दिखते हैं, वहीं भारत ने ब्रिक्स के माध्यम से भिन्न विचारधाराओं वाले देशों को एक पटल पर लाकर अपनी कूटनीतिक परिपक्वता का लोहा मनवाया है।