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रक्षा क्षेत्र में क्रांति: एमएसएमई और स्टार्टअप्स के बल पर रक्षा निर्यातक बना भारत

भारत का रक्षा क्षेत्र एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ देश केवल हथियारों का आयातक न रहकर एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा

कल्ट करंट डेस्क
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15 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारत का रक्षा क्षेत्र एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ देश केवल हथियारों का आयातक न रहकर एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप्स इस तकनीकी और औद्योगिक क्रांति के मुख्य आधार स्तंभ बने हैं। सरकार की नीतियों ने देशज रक्षा उत्पादन को एक नई गति प्रदान की है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय कंपनियां अब न केवल हल्के हथियार और गोला-बारूद, बल्कि उन्नत रडार सिस्टम, बख्तरबंद वाहन, मिसाइल घटक और रक्षा सॉफ्टवेयर भी दुनिया के कई देशों को निर्यात कर रही हैं। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों ने स्थानीय निर्माताओं को वैश्विक मानकों के उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन और अनुकूल वातावरण प्रदान किया है।

इस सफलता में नए रक्षा स्टार्टअप्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और उन्नत मैटेरियल साइंस में काम कर रहे युवा नवप्रवर्तक रक्षा बलों की आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नवाचारी समाधान विकसित कर रहे हैं। सरकार द्वारा स्थापित 'iDEX' (Innovations for Defence Excellence) जैसी योजनाओं ने इन स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकसित करने और सैन्य परीक्षणों के लिए आवश्यक फंडिंग और मेंटरशिप उपलब्ध कराई है।

निजी क्षेत्र और एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। कई रक्षा घटकों के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे घरेलू उद्योगों के लिए एक सुनिश्चित बाजार तैयार हुआ है। इस कदम से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, बल्कि देश के भीतर उच्च कौशल वाले लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन भी हो रहा है।

वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती धमक यह दर्शाती है कि देश में निर्मित सैन्य उत्पाद गुणवत्ता और लागत दोनों के मामले में प्रतिस्पर्धी हैं। मित्र देशों को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति से भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया है कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों की श्रेणी में अपना स्थान और मजबूत करेगा।