भारत ने संलयन ऊर्जा (Fusion Energy) के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। देश के एक प्रमुख टेक स्टार्टअप ने अपने स्वदेशी टोकामक 'PRAGYA' में सफलतापूर्वक पहला प्लाज्मा उत्पन्न कर इतिहास रच दिया है। यह सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जो भविष्य की स्वच्छ और असीमित ऊर्जा के लिए 'कृत्रिम सूरज' (Artificial Sun) विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
टोकामक एक ऐसा उपकरण है जिसमें शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करके अत्यधिक गर्म प्लाज्मा को नियंत्रित किया जाता है। परमाणु संलयन की प्रक्रिया में तारों और सूरज की तरह ही अत्यधिक तापमान पर परमाणुओं को आपस में जोड़कर ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। 'PRAGYA' में प्लाज्मा का सफल निर्माण यह साबित करता है कि भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर जटिल भौतिकी और उन्नत इंजीनियरिंग को क्रियान्वित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित होना है। भारतीय शोधकर्ताओं ने टोकामक के सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट, वैक्यूम वेसल और प्लाज्मा कंट्रोल सिस्टम को देश के भीतर ही डिजाइन और निर्मित किया है। इससे न केवल विदेशी तकनीकों पर निर्भरता समाप्त हुई है, बल्कि परियोजना की लागत में भी भारी कमी आई है, जो वैश्विक स्तर पर एक नया उदाहरण प्रस्तुत करती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, परमाणु संलयन ऊर्जा भविष्य का सबसे सुरक्षित और कार्बन-मुक्त ऊर्जा स्रोत है। परमाणु विखंडन (Fission) के विपरीत, इसमें किसी भी प्रकार का दीर्घकालिक खतरनाक रेडियोधर्मी कचरा पैदा नहीं होता और न ही इसमें किसी दुर्घटना का जोखिम रहता है। यदि यह तकनीक पूरी तरह से व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो यह वैश्विक ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन दोनों समस्याओं का स्थायी समाधान बन सकती है।
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र और वैज्ञानिक समुदाय में जबरदस्त उत्साह है। सरकार और निजी निवेशकों ने संलयन ऊर्जा अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। 'PRAGYA' की इस सफलता के साथ ही भारत अब अगले चरण के परीक्षणों की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत प्लाज्मा के तापमान को सूर्य के केंद्र से भी अधिक बढ़ाने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है।