राजधानी नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भव्य आगाज हुआ, जिसमें दुनिया के प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। भारत की मेजबानी में आयोजित इस सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों की ऐतिहासिक बैठक हुई। इस महत्वपूर्ण मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी ऐलान करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2035 तक अंतरिक्ष में अपना खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Space Station) स्थापित कर लेगा। इस घोषणा ने वैश्विक विज्ञान और अंतरिक्ष समुदाय का ध्यान भारत की ओर आकर्षित किया है।
सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को दोहराया गया। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करने के साथ-साथ किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों तथा उन्हें समर्थन देने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई। यह घोषणापत्र वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भारत के कूटनीतिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी पीएम मोदी के यूएन सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधारों के आह्वान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आज की आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताएं 1945 के दौर से पूरी तरह भिन्न हैं, इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ में संरचनात्मक बदलाव आवश्यक हैं। इस बयान से वैश्विक मंचों पर भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को और मजबूती मिली है।
तकनीक और वैज्ञानिक प्रगति के क्षेत्र में भारत की इस छलांग को वैश्विक विश्लेषक एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देख रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) पहले ही गगनयान और चंद्रयान मिशनों के जरिए अपनी श्रेष्ठता साबित कर चुका है। अब भारतीय स्पेस स्टेशन की घोषणा से देश न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में एक नई महाशक्ति बनकर उभरेगा।
ब्रिक्स सम्मेलन की इस सफलता से भारत का अंतरराष्ट्रीय कद और मजबूत हुआ है। सम्मेलन में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों के आर्थिक हितों को सुरक्षित करने पर भी आम सहमति बनी। नई दिल्ली से गूंजी यह आवाज वैश्विक शक्ति संतुलन में एक नया मोड़ साबित हो रही है, जहाँ भारत अंतरिक्ष तकनीक से लेकर कूटनीतिक नीति-निर्माण तक दुनिया का नेतृत्व करता दिखाई दे रहा है।