केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक बहुआयामी और तकनीक-आधारित रणनीति की घोषणा की है। गृह मंत्री अमित शाह ने समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि 'ड्रग-फ्री इंडिया' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 31 दिसंबर 2029 की अंतिम समयसीमा तय की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देश के तटीय और सीमावर्ती राज्यों में निगरानी प्रणालियों को अत्यधिक सख्त बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इस नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इसके तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को अन्य केंद्रीय एवं राज्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है। अंतर-एजेंसी समन्वय को बेहतर बनाने के लिए 'NCORD' (नारको कॉर्डिनेशन सेंटर) के डिजिटल नेटवर्क को जिला स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है, ताकि छोटी से छोटी इनपुट पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
वित्तीय मोर्चे पर, नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति को कुर्क करने और 'मनी लॉन्ड्रिंग' के पहलुओं की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। तस्करों के वित्तीय नेटवर्क को काटना इस नई रणनीति की मुख्य धुरी है। इसके अलावा, डार्क वेब और क्रिप्टो-करेंसी के माध्यम से होने वाली ऑनलाइन ड्रग तस्करियों पर नकेल कसने के लिए एक विशेष साइबर नारकोटिक्स सेल का गठन किया गया है।
मांग में कमी लाने (Demand Reduction) के उद्देश्य से, पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण और युवाओं में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक सामाजिक अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय और सामाजिक न्याय मंत्रालय के सहयोग से सीमावर्ती जिलों में विशेष नशामुक्ति शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। इसका लक्ष्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति भारत की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) की सुरक्षा की दृष्टि से एक निर्णायक कदम है। यदि सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगता है, तो इससे न केवल नशाखोरी पर रोक लगेगी, बल्कि नशीले पदार्थों के जरिए वित्तपोषित होने वाले संगठित अपराध और आतंकवाद को भी गहरा झटका लगेगा।