Cult Current
अर्थ संसार

भारतीय शेयर बाजार में IPO की बहार: सितंबर में जुटाए रिकॉर्ड ₹38,785 करोड़

भारतीय प्राथमिक शेयर बाजार (Primary Market/IPO Market) में इस वर्ष ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है। सितंबर महीने की विस्तृत वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार,

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
24 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारतीय प्राथमिक शेयर बाजार (Primary Market/IPO Market) में इस वर्ष ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है। सितंबर महीने की विस्तृत वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने मेनबोर्ड और एसएमई (SME) प्लेटफॉर्म के जरिए आईपीओ लाकर रिकॉर्ड ₹38,785 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई है। यह आंकड़ा भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में किसी एक महीने के दौरान जुटाई गई सबसे बड़ी आईपीओ राशियों में से एक बन गया है।

इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे मुख्य कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी स्थिति (Macroeconomic Fundamentals), कॉरपोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी और खुदरा (Retail) तथा संस्थागत निवेशकों (DIIs/FIIs) का अटूट विश्वास है। तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), ऑटो-कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के आईपीओ इस महीने बाजार में आए, जिन्हें निवेशकों का कई गुना अधिक सब्सक्रिप्शन मिला।

विशेष रूप से घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और म्यूचुअल फंडों के माध्यम से आने वाले एसआईपी (SIP) प्रवाह ने भारतीय बाजार को विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के झटकों से बचाकर एक मजबूत सुरक्षा घेरा प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त, युवा और नए निवेशकों द्वारा डीमैट खाते खोलकर प्राथमिक बाजार में सीधे भाग लेने की प्रवृत्ति ने भी आईपीओ में रिकॉर्ड बोलियों (Bids) के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा आईपीओ लिस्टिंग की समयसीमा को T+3 (आवंटन के तीन दिनों के भीतर लिस्टिंग) करने जैसे विनियामक सुधारों ने भी बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ाई है। इससे निवेशकों का पैसा तेजी से रोटेट हो रहा है और नई कंपनियों को अपनी विस्तार योजनाओं के लिए आसानी से पूंजी उपलब्ध हो रही है।

हालांकि, बाजार विश्लेषकों ने छोटे और नए निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल आईपीओ के 'ग्रे मार्केट प्रीमियम' (GMP) के बहकावे में न आएं। किसी भी कंपनी के आईपीओ में पैसा लगाने से पहले उसके वित्तीय स्वास्थ्य, प्रमोटर के बैकग्राउंड और मूल्यांकन (Valuation) का गहन विश्लेषण करना आवश्यक है। कुल मिलाकर, प्राथमिक बाजार की यह तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक और घरेलू विश्वास का एक ठोस प्रमाण है।