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शेयर बाजार में भारी गिरावट (सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी टूट)

बाजार में चौतरफा बिकवाली और गिरावट का आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार में आज एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला, जहाँ स्थानीय और वैश्विक नकारात्मक संकेतों के बीच भारी चौतरफा बिकवाली दर्ज की गई।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
24 Sep 2026
Solar farm during sunset

बाजार में चौतरफा बिकवाली और गिरावट का आंकड़ा

भारतीय शेयर बाजार में आज एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला, जहाँ स्थानीय और वैश्विक नकारात्मक संकेतों के बीच भारी चौतरफा बिकवाली दर्ज की गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,200 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 380 अंक से ज्यादा फिसलकर महत्वपूर्ण निचले स्तरों पर आ गया। बाजार खुलते ही बिकवाली का जो दौर शुरू हुआ, वह दिन का कारोबार समाप्त होने तक जारी रहा, जिससे निवशकों की संपत्तियों में लाखों करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया।

वैश्विक और भू-राजनीतिक तनाव का असर

शेयर बाजार में इस अचानक आई भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर गहराता भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता का माहौल है। मध्य पूर्व में हुथी विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध का लंबा खींचना और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर जारी हवाई हमलों ने वैश्विक निवेशकों के बीच घबराहट (Panic) पैदा कर दी है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च बने रहने के संकेतों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट आई, जिसका सीधा असर एशियाई और भारतीय बाजारों के निवेशकों के सेंटिमेंट पर पड़ा।

बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट की सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और ऑटोमोबाइल्स सेक्टर के शेयरों पर पड़ी। निफ्टी बैंक, निफ्टी आईटी और निफ्टी ऑटो इंडेक्स में भारी गिरावट देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज और हैवीवेट शेयरों में हुई बिकवाली ने सूचकांकों को नीचे खींचने में सबसे मुख्य भूमिका निभाई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार अपनी पूंजी निकाले जाने के कारण घरेलू बाजारों पर दबाव और अधिक बढ़ गया।

निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान

सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस बड़ी गिरावट के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) भारी अंतर से घट गया। इससे चंद घंटों में ही भारतीय निवेशकों को लगभग 4 से 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी अछूते नहीं रहे और उनमें भी 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा और छोटे निवेशकों को इस समय पैनिक सेलिंग (घबराहट में शेयर बेचने) से बचना चाहिए और केवल मौलिक रूप से मजबूत कंपनियों में ही बने रहना चाहिए।

बाजार का भावी रुख और विशेषज्ञों की सलाह

बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) का यह दौर जारी रह सकता है। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे फिलहाल नए बड़े निवेश से बचें और बाजार के निचले स्तरों पर स्थिर होने का इंतजार करें। आने वाले हफ्तों में घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले ही बाजार को अगली दिशा देंगे।