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ताइवान जलडमरूमध्य में बारूद की गंध: क्या ड्रैगन फुसफुसाहट से आगे निकल चुका है?

ताइवान की सीमा से सटे समुद्र में चीनी नौसेना की बढ़ती आक्रामकता ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। ड्रैगन के लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों ने ताइवान की नौसैनिक सीमा को इस कदर घेर लिया

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
28 Sep 2026
Solar farm during sunset

ताइवान की सीमा से सटे समुद्र में चीनी नौसेना की बढ़ती आक्रामकता ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। ड्रैगन के लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों ने ताइवान की नौसैनिक सीमा को इस कदर घेर लिया है कि किसी भी समय बड़े सैन्य टकराव का धमाका हो सकता है। पश्चिमी रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि बीजिंग अब केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं कर रहा, बल्कि अपनी रणनीतिक योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी में है।

अमेरिका ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपने विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) को ताइवान के करीब तैनात कर दिया है। व्हाइट हाउस से चेतावनी जारी की गई है कि ताइवान पर किसी भी तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का खुला उल्लंघन माना जाएगा। हालांकि, अमेरिकी राजनीति के भीतर चल रही खींचतान ने वैश्विक साझेदारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाशिंगटन सचमुच ताइवान के लिए सीधा युद्ध लड़ेगा?

इस पूरे तनाव का सबसे खतरनाक पहलू सेमीकंडक्टर और चिप्स की वैश्विक आपूर्ति है। ताइवान दुनिया की सबसे आधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण कंपनियों का केंद्र है। यदि इस क्षेत्र में युद्ध की एक भी चिंगारी भड़कती है, तो पूरी दुनिया की टेक-उद्योग प्रणाली, मोबाइल फोन से लेकर रक्षा प्रणालियों तक, पूरी तरह ठप्प पड़ जाएगी।

भारत के लिए यह सिर्फ एक दूरदराज का मुद्दा नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़ा मामला है। यदि चीन ताइवान में उलझता है या वहां सफलता पाता है, तो उसका अगला ध्यान भारत की सीमाओं पर दबाव बढ़ाने पर होगा। भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन को ताइवान में व्यस्त रखना भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण है।

भारत अपनी 'इंडो-पैसिफिक' नीति के तहत 'सप्लाई चेन रेजिलिएंस' पर जोर दे रहा है। अगर ताइवान संकट गहराता है, तो भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण का प्रमुख विकल्प बनने का ऐतिहासिक अवसर मिल सकता है। भारत में शुरू हुए सेमीकंडक्टर मिशन के लिए यह संकट एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों पेश करता है।

भारत ने हमेशा 'वन चाइना पॉलिसी' का सम्मान करने के साथ-साथ ताइवान के साथ अनौपचारिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत किया है। भारत इस मामले में संयम और शांतिपूर्ण बातचीत का पक्षधर है, लेकिन क्वाड (QUAD) गठबंधन के माध्यम से समुद्र में 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।