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होर्मुज की नाकेबंदी का खतरा: मस्कट की पहल और दिल्ली की चिंता!

ओमान की खाड़ी और रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ओमान के सुल्तान ने वैश्विक नौवहन और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक बड़ा संकल्प लिया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
28 Sep 2026
Solar farm during sunset

ओमान की खाड़ी और रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ओमान के सुल्तान ने वैश्विक नौवहन और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक बड़ा संकल्प लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य गतिरोध और हमलों के मंडराते खतरों के बीच ओमान ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। ओमान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डालना पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक आत्मघाती कदम साबित होगा।

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होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल के कुल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में अमेरिका और ईरान की नौसैनिक ताकतों के बीच जारी तनातनी ने पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में युद्ध के बादल गहरा दिए हैं। ओमान द्वारा की जा रही शांति मध्यस्थता यदि विफल होती है, तो इस मार्ग से तेल टैंकरों का गुजरना ठप्प हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम नियंत्रित करना लगभग असंभव हो जाएगा।

सऊदी अरब सहित अन्य प्रमुख खाड़ी देशों ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में चेतावनी जारी की है कि खाड़ी की सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। यदि इस समुद्री रास्ते पर युद्ध की एक भी चिंगारी भड़कती है, तो पूरे मध्य पूर्व में ऐसा आर्थिक और सैन्य संकट खड़ा होगा जिसका खामियाजा एशिया से लेकर यूरोप तक के देशों को भुगतना पड़ेगा। वैश्विक जहाजरानी कंपनियों ने पहले ही इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी कर दी है।

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भारतीय परिप्रेक्ष्य में, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिरता से जुड़ी हुई है। भारत अपनी कुल तेल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इस जलमार्ग में जरा सी भी बाधा का मतलब है भारत के भीतर ईंधन की दरों में अचानक उछाल, जिससे घरेलू मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ेगी और देश का चालू खाता घाटा (CAD) खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है।

इसके अतिरिक्त, खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनके द्वारा भारत भेजे जाने वाले अरबों डॉलर के प्रेषण (Remittance) पर भी इस सैन्य तनाव का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, भारत ओमान की इस शांति पहल का पूर्ण समर्थन कर रहा है और पर्दे के पीछे से ईरान तथा अमेरिका दोनों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह इस रणनीतिक जलमार्ग को युद्ध क्षेत्र बनने से बचाया जा सके।  

भारत की नौसेना ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अरब सागर और खाड़ी के मुहाने पर अपने गश्ती जहाजों और समुद्री टोही विमानों को अलर्ट पर रखा है। 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत भारतीय नौसेना अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारत का यह संतुलित और सतर्क रुख दर्शाता है कि वह इस क्षेत्र में शांति का समर्थक होने के साथ-साथ अपनी ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए हर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

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