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संगरूर में 3 बच्चों की हत्या का पर्दाफाश: कलयुगी मां का खौफनाक सच और रिश्तों का कत्ल

पंजाब के संगरूर जिले के बखोपीर गांव से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने माँ-बच्चे के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
25 Sep 2026
Solar farm during sunset

पंजाब के संगरूर जिले के बखोपीर गांव से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने माँ-बच्चे के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया है। रक्षाबंधन के त्योहार पर जिन मासूम बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, पुलिस तफ्तीश में वह कुदरती मौत या हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्रूर हत्या निकली। पुलिस ने खुलासा किया कि बच्चों की अपनी ही सगी मां लवप्रीत कौर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर तीनों मासूमों की जान ली।

शुरुआत में परिवार और गांव वालों को यही बताया गया था कि रक्षाबंधन पर लाई गई मिठाई खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन पुलिस की फोरेंसिक जांच और पिता के बयानों के आधार पर जब गहराई से पूछताछ की गई, तो परत-दर-परत सच सामने आने लगा। आरोपी मां लवप्रीत अपने अवैध प्रेम संबंधों में अपने ही तीन मासूम बच्चों को 'रोड़ा' मानती थी। प्रेमी हरजीत सिंह की उकसाहट पर उसने त्योहार के दिन ही मिठाई में जहरीला पदार्थ मिलाकर बच्चों को दे दिया।  

इस वारदात ने पूरे पंजाब में सनसनी फैला दी है और समाज के नैतिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगरूर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि हत्या की साजिश रचने वाला प्रेमी फिलहाल फरार है जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। स्थानीय लोग और रिश्तेदार इस कलयुगी मां के दुस्साहस और निर्दयता से स्तब्ध हैं।  

सामाजिक नजरिए से देखें तो यह घटना एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स और अनैतिक संबंधों के कारण परिवार टूटने और अपराध का रूप लेने की भयावह प्रवृत्ति को दर्शाती है। अपने स्वार्थ और वासना के लिए जन्म देने वाली मां का हत्यारा बन जाना यह साबित करता है कि मानवीय संवेदनाएं किस हद तक खत्म हो चुकी हैं।

संगरूर पुलिस और अभियोजन पक्ष का कहना है कि वे इस मामले में अदालत में केस को पूरी मजबूती से पेश करेंगे। इस तरह के दुर्लभ और जघन्य अपराधों में आरोपियों को फांसी या आजीवन कारावास जैसी कठोरतम सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में कोई भी व्यक्ति अपने ही मासूमों का खून बहाने का दुस्साहस न कर सके।