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अमरोहा फार्महाउस में घिनौनी वारदात: खाकी पर लगा दाग और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर इलाके से सामने आई यह दिल दहला देने वाली घटना समाज और कानून-व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। जिस पुलिस और सुरक्षाबलों के कंधों पर देश की महिलाओं की सुरक्षा का दारोमदार होता है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
25 Sep 2026
Solar farm during sunset

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर इलाके से सामने आई यह दिल दहला देने वाली घटना समाज और कानून-व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। जिस पुलिस और सुरक्षाबलों के कंधों पर देश की महिलाओं की सुरक्षा का दारोमदार होता है, उसी वर्दी के पहरेदारों पर एक 23 वर्षीय युवती से सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) का आरोप लगा है। अमरोहा के झुलपुरी स्थित उत्तराखंड के निर्दलीय विधायक के फार्महाउस पर घटी इस वारदात में यूपी पुलिस के एक उप-निरीक्षक (दरोगा), मुख्य आरक्षी (हेड कांस्टेबल) और सीआरपीएफ (CRPF) के दो जवान शामिल पाए गए।

​पीड़िता को बहला-फुसलाकर फार्महाउस लाया गया था, जहाँ शराब पार्टी के बाद आरोपियों ने इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया। पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए गूगल से स्थानीय पुलिस का नंबर निकाला और सीधे उच्च अधिकारियों से संपर्क कर पूरी आपबीती सुनाई। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने की कोशिशों की बातें भी सामने आईं, लेकिन मीडिया और पुलिस मुख्यालय के हस्तक्षेप के बाद चारों आरोपियों—संजय तोमर, प्रमोद, लालाराम और मोहित—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

​इस घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मचा दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "जिसका शासन ही अपराध पर टिका हो, उसकी पुलिस भी भ्रष्ट हो जाती है; खाकी पर लगा यह दाग कभी नहीं मिटेगा।" राजनीतिक दबाव बढ़ता देख पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और सीआरपीएफ जवानों के खिलाफ बर्खास्तगी की सिफारिश की है।

​यह मामला इस बात का कड़वा उदाहरण है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहाँ जाएं। फार्महाउस जैसी निजी संपत्तियों पर अवैध शराब पार्टियों और संदिग्ध गतिविधियों के संचालन पर भी स्थानीय पुलिस की ढिलाई उजागर हुई है। यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि हमारे सुरक्षा तंत्र की जवाबदेही और पुलिस सुधारों की तात्कालिक आवश्यकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

​कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में आरोपियों के खिलाफ त्वरित ट्रायल चलाकर कड़ी से कड़ी सजा देना बेहद जरूरी है ताकि मिसाल कायम की जा सके। वर्दी का फायदा उठाकर अपराध करने वालों के खिलाफ जब तक त्वरित न्याय की प्रणाली लागू नहीं होगी, तब तक आम जनता का न्याय प्रणाली पर विश्वास बहाल होना मुश्किल है।