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UNGA में बेंजामिन नेतन्याहू का ड्रामा: कूटनीतिक संदेश या राजनीतिक स्टंट?

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का सत्र उस समय सनसनीखेज हो गया जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने भाषण के दौरान मंच से एक पेजर निकालकर पूरी दुनिया के सामने लहराया

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
25 Sep 2026
Solar farm during sunset

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का सत्र उस समय सनसनीखेज हो गया जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने भाषण के दौरान मंच से एक पेजर निकालकर पूरी दुनिया के सामने लहराया। वैश्विक मंच पर नेताओं द्वारा सांकेतिक वस्तुओं का इस्तेमाल नया नहीं है, लेकिन नेतन्याहू का यह अंदाज बेहद आक्रामक और नाटकीय था। उन्होंने इस पेजर का उपयोग हिजबुल्लाह और मध्य पूर्व में जारी खुफिया युद्धों के संदर्भ में इजराइल की तकनीकी श्रेष्ठता और आक्रामक सुरक्षा नीति को रेखांकित करने के लिए किया।

नेतन्याहू ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि इजराइल पर हमला करने वाला कोई भी संगठन या देश कहीं भी सुरक्षित नहीं है। पेजर को हाथ में लेकर उन्होंने मध्य पूर्व में हुए हालिया पेजर धमाकों और खुफिया अभियानों का अप्रत्यक्ष जिक्र करते हुए दुनिया को यह संदेश दिया कि इजराइल की पहुँच दुश्मन के सबसे निजी और गुप्त संचार माध्यमों तक है। उनका यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इजराइली रक्षा प्रणाली की ताकत से रूबरू कराने का एक सोचा-समझा प्रयास था।

इस घटनाक्रम पर वैश्विक प्रतिक्रिया तीखी और विभाजित रही। जहाँ इजराइल के समर्थक देशों ने इसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ एक कड़ा और निर्भीक संदेश माना, वहीं कई पश्चिमी और अरब देशों ने इसे UNGA जैसे गंभीर मंच का राजनीतिकरण और गैर-संजीदा ड्रामा करार दिया। आलोचकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र का मंच शांति और कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए है, न कि युद्ध की धमकियाँ देने या गुप्त सैन्य अभियानों की नुमाइिश करने के लिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह कदम केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए नहीं, बल्कि उनके घरेलू वोटबैंक को साधने के लिए भी था। इजराइल के भीतर सरकार पर लगातार दबाव बन रहा है, ऐसे में नेतन्याहू यह दिखाना चाहते हैं कि वे दुश्मन के सामने झुकने वाले नेता नहीं हैं। वैश्विक मंच पर पेजर दिखाना उनके समर्थकों के बीच उनकी 'मजबूत राष्ट्रनायक' की छवि को पुनर्जीवित करने का एक जरिया साबित हुआ।

अंततः, UNGA में नेतन्याहू का यह कदम मध्य पूर्व में गहराते तनाव और कूटनीति के घटते दायरे का संकेत है। संवाद और शांति वार्ता के बजाय सैन्य शक्ति के प्रदर्शन को प्राथमिकता देना यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में फिलहाल शांति की गुंजाइश कम ही है। नेतन्याहू के इस कृत्य ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय दबावों की परवाह किए बिना अपनी सख्त नीति पर कायम रहने का इरादा रखते हैं।