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दिल्ली के कश्मीरी गेट पर चाकूबाजी: सरेराह लूटपाट का विरोध और राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल

देश की राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में यमुना बाजार अंडरपास के पास सरेराह हुई चाकूबाजी और हत्या की घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
25 Sep 2026
Solar farm during sunset

देश की राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में यमुना बाजार अंडरपास के पास सरेराह हुई चाकूबाजी और हत्या की घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। देर शाम ई-रिक्शा में सवार होकर जा रहे एक यात्री को बदमाशों ने घेर लिया और गनपॉइंट व चाकू की नोक पर उसकी कीमती वस्तुएं और नकदी छीनने की कोशिश की। जब पीड़ित ने अपनी मेहनत की कमाई लुटाने से इंकार किया और दिलेरी से विरोध जताया, तो बेखौफ बदमाशों ने उस पर चाकुओं से अंधाधुंध वार कर दिए।

गंभीर रूप से घायल यात्री सड़क पर तड़पता रहा और आरोपी वारदात के बाद अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से रफूचक्कर हो गए। राहगीरों की मदद से पीड़ित को पास के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कश्मीरी गेट और यमुना बाजार का इलाका काफी व्यस्त माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद इतने संवेदनशील इलाके में दिनदहाड़े या शाम के वक्त इस तरह की वारदात होना पुलिस गश्त (Patrolling) की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

उत्तर-पूर्वी और मध्य दिल्ली के इस सीमावर्ती इलाके में झपटमारी (Snatching) और लूटपाट के गिरोह लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि अंडरपास और सुनसान रास्तों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइटों का न होना तथा पुलिस पिकेट्स का निष्क्रिय रहना अपराधियों के हौसले बुलंद कर रहा है। लूट का विरोध करने पर जान ले लेना अब अपराधियों के लिए बेहद मामूली बात बनती जा रही है।

वारदात के बाद कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के सुराग मिल चुके हैं और उन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। हालाँकि, इस घटना ने दिल्ली पुलिस के 'सुरक्षित राजधानी' के दावों पर गहरा धक्का पहुँचाया है और आम जनता के बीच खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।

यह दर्दनाक हादसा यह संदेश देता है कि जब तक राजधानी के डार्क स्पॉट्स और संवेदनहीन इलाकों में रात के वक्त पुलिस की मौजूदगी और तकनीक आधारित निगरानी नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक बेगुनाह नागरिकों की जान इसी तरह अधर में लटकी रहेगी।