मध्य प्रदेश के दतिया जिले से ग्वालियर-झांसी हाईवे (हाड़ा पहाड़ क्षेत्र) पर दिनदहाड़े हुई अपहरण की वारदात ने राज्य में प्रशासनिक इकबाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 5 से 7 बेखौफ बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में एक युवक को सरेराह जबरन रोका और मारपीट करते हुए उसे गाड़ी में खींच लिया। इस पूरी घटना की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि बदमाश जिस सफेद रंग की स्कॉर्पियो (UP 93 BO 3238) में आए थे, उसकी नंबर प्लेट के ठीक नीचे 'पुलिस' लिखा हुआ था।
स्कॉर्पियो पर 'पुलिस' लिखा होने के कारण शुरुआत में मौके पर मौजूद आम राहगीरों को लगा कि शायद पुलिस की कोई आधिकारिक टीम किसी अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई कर रही है। लेकिन जब अपहृत युवक ने जान बचाने के लिए चीखना-चिल्लाना शुरू किया और विरोध किया, तब लोगों को अहसास हुआ कि यह पुलिस की कार्रवाई नहीं बल्कि बदमाशों की करतूत है। वारदात का वीडियो किसी राहगीर ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही दतिया के एसएसपी मंजीत सिंह चावला ने पूरे जिले में नाकेबंदी करा दी और सभी थानों को अलर्ट पर डाल दिया। पुलिस का भारी दबाव और घेराबंदी देखकर बदमाश घबरा गए। वे अपहृत युवक को इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के पास सड़क किनारे फेंककर फरार हो गए। पुलिस ने युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया, लेकिन बदमाशों की गाड़ियों पर 'पुलिस' लिखकर घूमना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक को दर्शाता है।
जांच में सामने आया है कि यह वारदात पुरानी रंजिश और राजीनामे के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से अंजाम दी गई थी। बदमाशों पर अपहरण, जान से मारने की कोशिश और अन्य संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। दतिया पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अधिकांश बदमाशों की पहचान कर ली है और उनकी तलाश में दबिश जारी है।
यह घटना दिखाती है कि कैसे अपराधी पुलिस के नाम और चिह्नों का दुरुपयोग कर आम जनता के मन में भ्रम पैदा कर रहे हैं। फर्जी तरीके से वाहनों पर 'पुलिस' या 'प्रशासन' लिखवाकर घूमने वाले वाहनों पर अगर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह के अपराधों का खतरा और बढ़ेगा। मध्य प्रदेश प्रशासन के लिए यह घटना कानून व्यवस्था की समीक्षा करने की चेतावनी है।