ड्रैगन ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसा हैरतअंगेज और खतरनाक कारनामा कर दिखाया है जिसने पेंटागन के शीर्ष वैज्ञानिकों और अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। चीनी सेना (PLA) ने जमीन से संचालित होने वाले एक ऐसे 'हाई-एनर्जी लेजर वेपन' का सफल परीक्षण किया है जो अंतरिक्ष में तैर रहे उपग्रहों के सेंसर को केवल कुछ सेकंड में पूरी तरह से नष्ट या अंधा कर सकता है। इस हथियार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बिना कोई मलबा पैदा किए दुश्मन के संचार और जासूसी तंत्र को पूरी तरह से पंगु बना देता है।
चीनी सरकारी मीडिया और लीक हुई तकनीकी रिपोर्टों के अनुसार, यह लेजर सिस्टम निरंतर आधार पर असीमित ऊर्जा बीम दाग सकता है, जिससे पारंपरिक एंटी-सैटेलाइट मिसाइलों की भारी-भरकम लागत और सीमाओं से मुक्ति मिल जाती है। अमेरिका के जासूसी उपग्रह जब चीनी सैन्य ठिकानों के ऊपर से गुजर रहे थे, तब उनके ऑप्टिकल सेंसर्स में अचानक आई खराबी के बाद इस घातक चीनी लेजर परीक्षण का पर्दाफाश हुआ। अमेरिकी अंतरिक्ष कमान ने इसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष संधियों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
इस लेजर हथियार के आने के बाद वैश्विक सैन्य संतुलन पूरी तरह से चीन के पलड़े में झुकता नजर आ रहा है। आधुनिक युद्धों में अमेरिका और उसके सहयोगियों की पूरी सैन्य रणनीति उपग्रह-आधारित जीपीएस, रडार और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग पर टिकी हुई है। यदि चीन युद्ध की स्थिति में अमेरिकी उपग्रहों को इस लेजर तकनीक से अंधा कर देता है, तो अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और युद्धपोत बिना दिशा-निर्देश के पूरी तरह बेकार हो जाएंगे।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में चीन की यह नई 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (DEW) क्षमता भारत के लिए एक अत्यंत गंभीर और सीधी चेतावनी है। भारत के रक्षा और संचार उपग्रह, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की हरकतों पर 24 घंटे पैनी नजर रखते हैं, इस लेजर हथियार के सीधे निशाने पर आ सकते हैं। यदि चीन सीमा विवाद के दौरान इस तकनीक का इस्तेमाल करता है, तो भारतीय सेना की उपग्रह-आधारित निगरानी क्षमता को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
इस चीनी खतरे का मुकाबला करने के लिए भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपने स्वदेशी 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' और 'एंटी-लेजर कोटिंग' प्रोजेक्ट्स को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। भारतीय वैज्ञानिक अब ऐसे विशेष शील्ड और ऑप्टिकल सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं जो भारतीय उपग्रहों को चीनी लेजर बीम के प्रभावों से सुरक्षित रख सकें। इसके साथ ही भारत ने अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए मित्र देशों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने का दायरा बढ़ा दिया है।
अंतरिक्ष का यह अदृश्य और साइलेंट युद्ध अब किसी काल्पनिक फिल्म की कहानी नहीं रहा, बल्कि एक खौफनाक हकीकत बन चुका है। चीन की यह तकनीकी छलांग भारत समेत पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि आने वाले समय में युद्ध का मैदान केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि अदृश्य किरणों और किरणों की गति से लड़ा जाएगा। भारत को इस भविष्य के युद्ध के लिए खुद को हर मोर्चे पर पूरी तरह तैयार रखना होगा।
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