भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज में एक ऐसा क्रांतिकारी बायो-मेडिकल फॉर्मूला विकसित किया है जिसने दुनिया भर की फार्मास्युटिकल कंपनियों की नींद उड़ा दी है। वैज्ञानिकों ने प्राचीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (विशेषकर अश्वगंधा, हल्दी के करक्यूमिन और गिलोय) से प्राप्त सक्रिय अणुओं को आधुनिक 'नैनो-टेक्नोलॉजी' के साथ मिलाकर एक नया कैंसर-रोधी ड्रग तैयार किया है। इस दवा ने तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल्स में कैंसर कोशिकाओं को बिना किसी साइड-इफेक्ट के नष्ट करने में 90% से अधिक सफलता हासिल की है।
अब तक कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी मरीज के शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाती थीं, जिससे मरीज का शरीर अत्यंत कमजोर हो जाता था। लेकिन इस स्वदेशी 'आयुष-नैनो' दवा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल टारगेटेड कैंसर सेल्स पर ही हमला करती है और शरीर के बाकी अंगों को पूरी तरह सुरक्षित रखती है। लैंसेट और नेचर जैसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं ने इस भारतीय शोध को कैंसर विज्ञान के इतिहास का नया सूर्योदय करार दिया है।
इस शोध पत्र के सार्वजनिक होते ही अमेरिका, ब्रिटेन और जापान के चिकित्सा अनुसंधान केंद्रों ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। पश्चिमी देश, जो अब तक आयुर्वेद को केवल एक 'वैकल्पिक चिकित्सा' मानकर खारिज करते थे, आज उसी आयुर्वेद के वैज्ञानिक और आणविक प्रमाणों के सामने नतमस्तक हैं। इस खोज ने सिद्ध कर दिया है कि भारत का प्राचीन चरक और सुश्रुत सहिंता का ज्ञान आधुनिक बायो-टेक्नोलॉजी का मार्गदर्शन करने में पूरी तरह सक्षम है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह खोज भारत को स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) के क्षेत्र में विश्वगुरु बनाने की ओर एक बहुत बड़ा कदम है। भारत में कैंसर का इलाज अत्यंत खर्चीला होने के कारण लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो जाते थे। इस स्वदेशी दवा के बाजार में आने से कैंसर का इलाज मौजूदा दरों से 80 प्रतिशत तक सस्ता हो जाएगा, जिससे भारत ही नहीं बल्कि पूरे 'ग्लोबल साउथ' के देशों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा मिल सकेगी।
इसके अलावा, यह सफलता भारत के जड़ी-बूटी और औषधीय खेती (Medicinal Farming) क्षेत्र के लिए नए दरवाजे खोलने वाली है। देश के लाखों किसानों को अश्वगंधा, गिलोय और अन्य दुर्लभ जड़ी-बूटियों की व्यावसायिक खेती से भारी मुनाफा होगा। भारत की 'मेडिकल टूरिज्म' इंडस्ट्री को भी इससे भारी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि दुनिया भर से मरीज अब इस सुरक्षित और सस्ती थेरेपी के लिए भारत का रुख करेंगे।
यह बायोटेक क्रांति यह साबित करती है कि जब भारत अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर कसता है, तो वह मानव कल्याण के लिए नए चमत्कार कर सकता है। भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया को आरोग्य और जीवनदान का नया मार्ग दिखाया है।
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