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बहुभाषी साहित्यकारों का महासंगम: गांधी–शास्त्री जयंती पर

आज गांधी– शास्त्री जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा नैहाटी के समरेश बसु सभागार में बहुभाषी काव्य पाठ का आयोजन हुआ।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
03 Oct 2026
Solar farm during sunset

गांधी जयंती पर बहुभाषी काव्य पाठ का आयोजन 
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बहुभाषी काव्य पाठ केवल भाषाओं का नहीं संवेदनाओं का भी मिलन है: शंभुनाथ 
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गांधी ने समावेशी, आत्मनिर्भर,मानवीय और लोकतांत्रिक समाज का सपना देखा था 
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आज गांधी– शास्त्री जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा नैहाटी के समरेश बसु सभागार में बहुभाषी काव्य पाठ का आयोजन हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।मिशन के अध्यक्ष डॉ शंभुनाथ ने अपने संदेश में कहा कि बहुभाषी काव्यपाठ केवल भाषाओं का नहीं संवेदनाओं का भी मिलन है। बहुभाषी काव्यपाठ  हमारी सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर करता है। भाषाएं अलग–अलग हो सकती हैं, लेकिन कविता प्रेम, दुख, स्मृति और आशा की एक साझी आवाज है। ऐसे आयोजनों में हम कविता ही नहीं एक–दूसरे का हृदय भी सुनते हैं। संदेश का पाठ प्रो. एन चंद्रा राव ने किया। मिशन के संरक्षक श्री रामनिवास द्विवेदी ने अपने संदेश में कहा कि आज का दिन अविस्मरणीय है।आज राष्ट्रपिता गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती है। दोनों मनीषियों को सादर नमन। गांधी की पहचान वैश्विक है। उनके जैसा मनुष्य होना दुर्लभ है। मैं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित भाषाई प्रेम और संवाद के काव्य उत्सव को अपना आशीष देता हूं।समाज निर्माण,राष्ट्र प्रेम और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण का यह सफर चलता रहे। मैं इस बहुभाषी काव्य पाठ में शामिल हिंदी, उर्दू और बांग्ला भाषा के सभी कवियों को धन्यवाद देता हूं। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की धरती को प्रणाम करता हूं। संदेश का पाठ प्रो मंटू दास ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यासागर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि यह समय हाथ थामकर आगे बढ़ने का है। यह बहुभाषी काव्य पाठ गांधी के सपनों के भारत को साकार करने की दिशा में एक छोटा-सा प्रयास है। गांधी ने एक समावेशी, आत्मनिर्भर, मानवीय और लोकतांत्रिक समाज का सपना देखा था उस सपने को बचाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उपाध्यक्ष मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि कविता पंचतत्व से बनती है। ये पंचतत्व हैं- शब्द, बिम्ब, प्रतीक, विचार और दर्शन। राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह कार्यक्रम गांधी जी और शास्त्री जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर तमाल साहा, पार्थ सारथी सरकार, सुरेश शॉ, अली शाहिद दिलकश, अमरजीत पंडित, सुशील कांति, शकील अख्तर, डॉ. कलावती कुमारी, राजेश साव, नागेंद्र पंडित, विकास कुमार, डॉ. इबरार ख़ान, सिपाली गुप्ता, शाहनवाज़ आदिल, सुषमा कुमारी, सत्यम तिवारी, कुसुम भगत और सत्यम पांडेय ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन सूर्य देव रॉय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन असित पांडेय ने दिया। इस अवसर पर गंगा प्रसाद, उदयराज सिंह, राजेश पांडेय, सुशील पांडेय, अवध पांडेय, रवि भगत, दिलीप कुमार, डॉ नवनीता दास, डॉ संजय राय, रूपेश कुमार यादव,उत्तम कुमार, कन्हैया भगत,मनीषा गुप्ता, संजीत चौधरी, विकास जायसवाल,अजय पोद्दार,प्रभाकर साव,शबाना खातून,अनूप प्रसाद,फरहान अजीज़,सुमित ठाकुर,उषा कुमारी दूबे,प्रींशु ठाकुर, सलोनी शर्मा, अनुपमा वर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद थे।