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ताइवान पर चीनी घेराबंदी!

ताइवान की स्वायत्तता और संप्रभुता को लेकर चीन की नीयत बेहद खतरनाक हो चुकी है। चीनी सेना (PLA) ने ताइवान के चारों ओर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य घेराबंदी अभ्यास शुरू कर दिया है। दर्जनों चीनी लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोत ताइवान की मध्य रेखा को पार कर लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
08 Oct 2026
Solar farm during sunset

ताइवान की स्वायत्तता और संप्रभुता को लेकर चीन की नीयत बेहद खतरनाक हो चुकी है। चीनी सेना (PLA) ने ताइवान के चारों ओर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य घेराबंदी अभ्यास शुरू कर दिया है। दर्जनों चीनी लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोत ताइवान की मध्य रेखा को पार कर लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने अपने सभी मिसाइल सिस्टम को हाई अलर्ट पर रख दिया है और देश की नागरिक सुरक्षा एजेंसियों को संभावित हमले से निपटने के लिए तैयार रहने के आदेश जारी कर दिए हैं। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन केवल अभ्यास नहीं कर रहा, बल्कि वह ताइवान पर पूर्ण सैन्य आक्रमण की वास्तविक तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है।

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति और पेंटागन ने चेतावनी दी है कि ताइवान की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। अमेरिका द्वारा ताइवान को दी जा रही आधुनिक हथियारों की आपूर्ति से चीन बुरी तरह बौखला गया है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान उसका अभिन्न अंग है और इसके पुनर्मिलन के लिए वह बल प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हटेगा। ताइवान स्ट्रैट में बढ़ रही इस तनातनी ने पूरे वैश्विक शेयर बाजारों और तकनीकी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि ताइवान दुनिया की सबसे आधुनिक सेमीकंडक्टर (चिप) निर्माण का मुख्य केंद्र है।

भारतीय परिपेक्ष्य से देखा जाए, तो ताइवान पर चीनी हमला भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल, गाड़ियां, लैपटॉप, और यहां तक कि रक्षा उपकरण भी सेमीकंडक्टर चिप्स पर निर्भर हैं। दुनिया की 60% से अधिक और सबसे उन्नत 90% सेमीकंडक्टर चिप्स केवल ताइवान की कंपनी TSMC बनाती है। यदि चीन ताइवान पर कब्जा करता है या वहां युद्ध शुरू होता है, तो भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे भारत में लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

सामरिक दृष्टि से, ताइवान पर चीन का नियंत्रण भारत के लिए लद्दाख और पूर्वोत्तर सीमाओं पर चीन के हौसले और बुलंद कर देगा। अगर चीन ताइवान को आसानी से हड़पने में कामयाब रहता है, तो उसका अगला ध्यान भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी आक्रामकता बढ़ाने पर होगा। यही वजह है कि भारत अब ताइवान के साथ अपने संबंधों को चुपचाप मजबूत कर रहा है। भारत में ताइवानी कंपनियों को चिप निर्माण संयंत्र (Semiconductor Fabs) लगाने के लिए बड़े प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित किया जा सके।

कूटनीतिक मोर्चे पर, भारत ने आधिकारिक तौर पर 'वन चाइना पॉलिसी' का पालन करने की बात कही है, लेकिन हाल के वर्षों में भारत ने ताइवान के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग को अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। भारत अब चीन की धमकियों की परवाह किए बिना ताइवान के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। भारत का यह नया आत्मविश्वास दिखाता है कि वह अपनी कूटनीतिक सीमाओं का विस्तार करने और चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ताइवान संकट केवल एक द्वीप का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र बनाम तानाशाही की एक वैश्विक लड़ाई बन चुका है। यदि इस मोर्चे पर युद्ध छिड़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था को द्वितीय विश्व युद्ध से भी बड़े संकट में डाल देगा। भारत इस पूरी स्थिति पर सतर्कता से नजर बनाए हुए है और देश में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देकर अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करने में जुटा है। आने वाले समय में ताइवान स्ट्रैट का यह तनाव दुनिया की दिशा तय करने वाला है।

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