एशिया-प्रशांत और दक्षिण एशियाई महाद्वीप के बदलते सामरिक परिदृश्य के बीच एक बेहद महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहा है। अमेरिकी वायुसेना अपने सबसे उन्नत और अचूक माने जाने वाले पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान F-35 लाइटनिंग II को भारत-पाकिस्तान सीमा के समीप तैनात करने की तैयारी कर रही है। राजस्थान के रणनीतिक रूप से संवेदनशील जोधपुर एयरबेस पर आयोजित होने जा रहे भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'तरंग शक्ति' में अमेरिकी F-35 जेट्स हिस्सा लेंगे। किसी भारतीय सैन्य अभ्यास में दुनिया के इस सबसे आधुनिक फाइटर जेट की संभावित भागीदारी ने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा के बेहद करीब जोधपुर में होने वाले इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में अमेरिका के अलावा फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ग्रीस और यूएई सहित कई मित्र देशों की वायुसेनाएं भाग ले रही हैं। इतने संवेद्य क्षेत्र में F-35 जैसे अदृश्य (Stealth) लड़ाकू विमान का उतरना रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। F-35 की सबसे बड़ी खासियत इसकी रडार को चकमा देने की क्षमता, एडवांस्ड सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर तकनीक है। पाक सीमा के निकट इसकी मौजूदगी भारत और उसके वैश्विक साझेदारों की मजबूत होती सैन्य एकजुटता का एक प्रत्यक्ष और कड़ा प्रदर्शन है।
भारतीय वायुसेना के लिए अमेरिकी F-35 की उपस्थिति तकनीकी और परिचालन की दृष्टि से एक बड़ा अवसर साबित होगी। इस अभ्यास के जरिए भारतीय पायलटों को राफेल, सुखोई-30 MKI और स्वदेशी तेजस जैसे अपने अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों के साथ पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ प्लेटफॉर्म का तालमेल (Interoperability) परखने का मौका मिलेगा। आधुनिक हवाई युद्ध में भिन्न-भिन्न तकनीक वाले विमानों के साथ मिलकर 'नेटवर्क्ड एयर वॉरफेयर' को अंजाम देने की यह समझ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भारत की क्षमताओं को नई धार देगी।
भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो भारत-पाक सीमा के पास F-35 का यह अभ्यास क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला कदम है। जहाँ एक तरफ चीन और पाकिस्तान लगातार अपने रक्षा नेटवर्क को साझा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत का क्वाड (Quad) साझेदारों और पश्चिमी देशों के साथ यह साझा अभ्यास एक मजबूत शक्ति प्रदर्शन (Power Projection) की भांति कार्य करता है। सीमा के इतने करीब अमेरिका के शीर्ष फाइटर जेट्स का उड़ान भरना न केवल पड़ोसी देशों को सख्त संदेश देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत वैश्विक रक्षा अभियानों का एक नया और प्रमुख केंद्र बन चुका है।
समग्र विश्लेषण करें तो 'तरंग शक्ति' में F-35 की संभावित तैनाती केवल एक नियमित सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य कूटनीति का एक नया अध्याय है। यह घटनाक्रम भारत की बहुपक्षीय रक्षा साझेदारियों को और अधिक गहरा करने के साथ-साथ यह साबित करता है कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां हर नई तकनीक को अपनाने के लिए तत्पर हैं। वायु रक्षा के मोर्चे पर यह कदम भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों को वैश्विक मानकों के शीर्ष स्तर पर स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।