राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले एक बड़े साइबर आतंकवाद के नेटवर्क पर तगड़ा प्रहार किया है। एजेंसी ने एक साथ 5 राज्यों—महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, बिहार और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली—के 5 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई गुजरात में दर्ज साइबर आतंकवाद के एक संवेदनशील मामले की जांच के सिलसिले में की गई। तड़के शुरू हुई इस व्यापक छापेमारी से संदिग्धों के नेटवर्क और साइबर हैकिंग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संपर्कों में हड़कंप मच गया।
एनआईए के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत सरकार की 54 महत्वपूर्ण वेबसाइटों पर हुए एक सुनियोजित 'डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस' (DDoS) अटैक की साजिश से जुड़ा है। इस हमले के जरिए देश की क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (CII) को निशाना बनाकर राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को नुकसान पहुंचाने और जनता में डर फैलाने की कोशिश की गई थी। मामले में गुजरात एटीएस द्वारा 2 मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था।
तकनीकी विश्लेषण और जांच के दौरान खुलासा हुआ कि गिरफ्तार मुख्य आरोपियों को हमले की तैयारी करने और अपनी हैकिंग स्किल्स को अपग्रेड करने में कई अन्य संदिग्ध तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे थे। इसके बाद अदालत से सर्च वारंट हासिल कर एनआईए की टीमों ने महाराष्ट्र के जुन्नर (पुणे), गुजरात के नडियाद (खेड़ा), तेलंगाना के रामागुंडम, बिहार के गोपालगंज और दिल्ली में संदिग्धों के ठिकानों की नाकाबंदी कर तलाशी ली।
छापेमारी के दौरान एनआईए ने हैकिंग गतिविधियों से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज, 3 लैपटॉप, 5 मोबाइल फोन और कई पेन ड्राइव समेत भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इन उपकरणों से डेटा एक्सट्रेक्ट कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन संदिग्धों के तार सीमा पार बैठे विदेशी हैकर्स या किसी राष्ट्र-विरोधी संस्था से जुड़े थे। हिरासत में लिए गए संदिग्धों से घंटों तक गहन पूछताछ की गई।
इस पूरी कार्रवाई का विश्लेषण करें तो यह मामला भारत की डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर एक गंभीर चेतावनी और एनआईए की बड़ी सफलता दोनों को दर्शाता है। आज के आधुनिक दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि डेटा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए साइबर स्पेस में भी लड़ा जा रहा है। 5 राज्यों में की गई यह छापेमारी यह साबित करती है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब पारंपरिक आतंकवाद के साथ-साथ 'डिजिटल आतंकवाद' से निपटने के लिए भी पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद हैं।