ढाका में राजनीतिक बदलाव के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्ते एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त ने ढाका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर द्विपक्षीय व्यापार और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा की है।
इस उच्च स्तरीय मुलाकात को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने बांग्लादेश की सरजमीं का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने देने की अपनी प्राथमिकता को स्पष्ट रूप से दोहराया है, वहीं बांग्लादेश ने पारगमन और ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध किया है।
दोनों देशों के बीच सीमा पर बढ़ते अवैध आव्रजन और घुसपैठ की घटनाओं ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को हाई अलर्ट पर रखा है और तकनीकी निगरानी बढ़ा दी है।
दूसरी ओर, चीन और पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों पर भारत कड़ी नजर बनाए हुए है। नई दिल्ली का प्रयास है कि बांग्लादेश के साथ पिछले दो दशकों में बने मजबूत व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध किसी भी सूरत में प्रभावित न हों।
विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में यह घटनाक्रम दूरगामी प्रभाव डालेगा। भारत का अपने पड़ोसियों के साथ संतुलित और दृढ़ कूटनीतिक रुख ही इस क्षेत्र में शांति और आर्थिक समृद्धि की दिशा तय करेगा।