असम की राजधानी गुवाहाटी को झकझोर कर रख देने वाले एक सनसनीखेज मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) के पांचों आरोपियों—परमेश्वर नाथ, हिरकज्योति दास, विशाल बरुआ, लक्ष्मीधर नाथ और रजीप अली—को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शहर के सौकुची स्थित 'रंगमन ग्रैंड होमस्टे' की है, जहाँ आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा को हवस का शिकार बनाया गया। इस खौफनाक वारदात के सामने आते ही पूरे राज्य में आक्रोश की लहर दौड़ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बिना किसी देरी के विशेष टीमों का गठन किया और वारदात के चौबीस घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोलपारा निवासी परमेश्वर नाथ पीड़िता को झांसा देकर और बहला-फुसलाकर गुवाहाटी के इस होमस्टे में लाया था। वहां आरोपियों ने मिलकर नाबालिग को बंधक बनाया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद आरोपी उसे पानबाजार इलाके में सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा।
जांच में तेजी लाते हुए पुलिस ने डिजिटल सर्विलांस और होमस्टे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसके बाद मुख्य आरोपी परमेश्वर नाथ के साथ उसके सहयोगियों हिरकज्योति दास, विशाल बरुआ, लक्ष्मीधर नाथ और रजीप अली को दबोच लिया गया। इनमें से विशाल बरुआ और लक्ष्मीधर नाथ इसी होमस्टे के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह भी गहराई से जांच कर रही है कि बिना सही पहचान पत्र और सुरक्षा सत्यापन के नाबालिग को कमरे में प्रवेश कैसे दिया गया, और क्या इस अवैध गतिविधि में होमस्टे प्रबंधन की कोई सीधी संलिप्तता थी।
इस जघन्य अपराध ने एक बार फिर से महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के साथ-साथ शहरों में बिना कड़े नियमन के चल रहे होमस्टे और पेइंग गेस्ट (PG) आवासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक रूप से चलाए जा रहे ऐसे स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों और बिना सत्यापन के कमरे देने की परिपाटी आपराधिक तत्वों के लिए पनाहगाह बनती जा रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे सभी होमस्टे के लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की कड़ाई से समीक्षा की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
समग्र विश्लेषण करें तो गुवाहाटी पुलिस की यह त्वरित और सख्त कार्रवाई न्याय की दिशा में एक पहला और महत्त्वपूर्ण कदम है। पॉक्सो जैसे सख्त कानूनों के तहत त्वरित सुनवाई और दोषियों को कठोरतम सजा दिलाना ही पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय दिला सकता है। इसके साथ ही, समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि शहर की बेटियां खुद को हर जगह सुरक्षित महसूस कर सकें।