पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय एक बड़ा मोड़ आया जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा के पूर्व मुख्य सचेतक निर्मल घोष को पुलिस ने ओडिशा के बालासोर से गिरफ्तार कर लिया। बैरकपुर अदालत ने शुक्रवार को उन्हें जबरन वसूली के एक पुराने मामले में 8 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। निर्मल घोष की गिरफ्तारी केवल एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह वर्ष 2024 के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज हत्याकांड से जुड़ी कड़ियों को फिर से खोलने का एक बड़ा विधिक कदम है। अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए वे पिछले कुछ दिनों से भूमिगत थे, लेकिन तकनीकी निगरानी ने उन्हें कानून के दायरे में ला खड़ा किया।
निर्मल घोष पर मुख्य आरोप आरजी कर कांड की पीड़िता के अंतिम संस्कार में "अत्यधिक जल्दबाजी" बरतने और साक्ष्यों को नष्ट करने का है। पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई नई प्राथमिकी (FIR) में आरोप लगाया गया है कि घोष और उनके सहयोगियों ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध दबाव बनाकर शव का दाह-संस्कार आनन-फानन में करवाया था। आरोप है कि उस समय दाह-संस्कार गृह में प्रक्रिया के दौरान न केवल शुल्क माफ कर दिया गया था, बल्कि परिजनों के स्थान पर स्थानीय प्रभाव वाले लोगों के हस्ताक्षर लिए गए थे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर गठित विशेष जांच के तहत पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या यह साक्ष्यों को मिटाने की एक सुनियोजित साजिश थी।
हालाँकि, उन्हें जिस मामले में अभी हिरासत में भेजा गया है, वह जबरन वसूली (Extortion) का एक अलग प्रकरण है। घोष के ही पूर्व चालक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि नेता ने बलपूर्वक उसका एक लॉटरी टिकट छीन लिया था, जिस पर भारी इनामी राशि निकली थी। पुलिस अब इस मामले के साथ-साथ आरजी कर मामले में उनकी भूमिका की गहन पूछताछ कर रही है। उनके वकीलों ने तर्क दिया है कि आरजी कर वाले मामले में अदालत ने उन्हें पहले ही जमानत दे दी है, लेकिन सरकारी पक्ष का कहना है कि अन्य गंभीर आरोपों और साक्ष्य मिटाने की साजिश के चलते उनकी कस्टडी आवश्यक है।
इस गिरफ्तारी के राजनीतिक निहितार्थ भी गहरे हैं। निर्मल घोष का नाम तृणमूल कांग्रेस के उन कद्दावर नेताओं में शुमार रहा है जो उत्तर 24 परगना जिले में पार्टी की धुरी माने जाते थे। उनके पुत्र तीर्थंकर घोष की भी पूर्व में इसी तरह के आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी हो चुकी है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इसे "सच्चाई की जीत" करार देते हुए कहा है कि पूर्ववर्ती सरकार में संरक्षण प्राप्त नेताओं का अब कानून से बचना संभव नहीं है। वहीं, सत्तारूढ़ दल ने इस मामले से खुद को अलग करते हुए इसे व्यक्तिगत कानूनी कार्यवाही बताया है, जिससे राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
निष्कर्ष के तौर पर, निर्मल घोष की यह गिरफ्तारी आरजी कर हत्याकांड के उन अनसुलझे रहस्यों की ओर इशारा करती है, जिन पर समय की धूल जमने लगी थी। यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार अब उन सभी बिंदुओं की बारीकी से जांच करना चाहती है, जो उस भयावह रात के बाद साक्ष्यों को प्रभावित करने के लिए उठाए गए थे। अगले आठ दिनों की पुलिस हिरासत यह तय करेगी कि तत्कालीन व्यवस्था में किस स्तर पर और किन लोगों के इशारे पर यह 'जल्दबाजी' की गई थी। न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार और नागरिक समाज के लिए यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।