महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग में 'ड्रैग इंस्पेक्टर' (Group-B) पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला सामने आया है। स्क्रीन परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि और पुलिस की शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद आयोग ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। परीक्षा की निष्पक्षता और साख बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया यह कदम राज्य के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
इस मामले की शुरुआत मार्च 2026 में आयोजित हुई ऑफलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा से हुई थी, जिसके बाद परिणाम जारी कर जुलाई महीने में लगभग 488 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार (Interview) भी पूरा हो चुका था। अंतिम चयन सूची जारी होने से ठीक पहले अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा ईमेल और ज्ञापनों के जरिए पेपर लीक होने तथा प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गईं। MPSC ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए 27 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त से जांच का अनुरोध किया था।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (Crime Branch) द्वारा सौंपी गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग की गई थी और अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया गया था। इस खुलासे के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने MPSC के अधिकारियों और एक कोचिंग एकेडमी के संचालक सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया। धांधली की पुष्टि होते ही आयोग ने संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने का कड़ा रुख अपनाया।
इस निरस्तीकरण के कारण उन अभ्यर्थियों को सबसे बड़ा झटका लगा है जो साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर अंतिम चयन की उम्मीद लगाए बैठे थे। सालों की कड़ी मेहनत और परीक्षा के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद फिर से शून्य से शुरुआत करना छात्रों के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कष्टदायक है। वहीं, राज्य के युवा संगठनों और छात्र नेताओं ने पारदर्शी प्रक्रिया की मांग करते हुए पेपर लीक माफिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आयोग ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि जल्द ही नए सिरे से पुनः परीक्षा (Re-examination) आयोजित की जाएगी। पूर्व में आवेदन कर चुके योग्य छात्रों को दोबारा आवेदन करने या कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी। MPSC का कहना है कि भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और परीक्षार्थियों के विश्वास को बहाल रखने के लिए यह कड़ा निर्णय लेना अनिवार्य था, ताकि भविष्य में इस तरह की मालप्रैक्टिस पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।