पवित्र नगरी वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे काशी के विश्व प्रसिद्ध 84 घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। गंगा के इस विकराल और उग्र रूप को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गंगा में सभी प्रकार के छोटे और बड़े नौका संचालन (Boat Operations) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया है।
गंगा के जलस्तर में हुई इस बेतहाशा वृद्धि के कारण प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और अस्सी घाट के बड़े हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह का काम अब घाटों की ऊपरी सीढ़ियों और छतों पर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। प्रसिद्ध 'गंगा आरती' को भी सुरक्षा कारणों से घाट की निचली सीढ़ियों से हटाकर ऊपरी स्थानों पर सांकेतिक रूप से आयोजित किया जा रहा है। इससे पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की आवाजाही पर भारी असर पड़ा है।
वाराणसी के निचले इलाकों, जैसे सामने घाट, नगवा और मारुति नगर की सड़कों पर गंगा का पानी घुस गया है, जिससे सैकड़ों मकान पानी से घिर गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए दर्जनों राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहाँ उन्हें भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं। एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस की टीमों को 24 घंटे गश्त पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के जिलाध्यक्ष और पुलिस आयुक्त से सीधी बातचीत कर राहत और बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। पीएम मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित नागरिकों को हर संभव सहायता दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि जलभराव वाले क्षेत्रों में खाद्यान्न और दवाओं की कोई कमी न हो। उन्होंने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की विशेष देखरेख करने के भी कड़े निर्देश दिए हैं।
वाराणसी में गंगा का यह जलस्तर उत्तराखंड और ऊपरी मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण बढ़ा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और गंगा के रुख पर पैनी नजर रखे हुए है। काशीवासियों और तीर्थयात्रियों से अपील की गई है कि वे जलमग्न घाटों के पास जाने से बचें और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करें।