आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कथित बहुचर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री के. नागेश्वर राव को गिरफ्तार कर लिया है। सुबह-सुबह हुई इस गिरफ्तारी ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि पूर्व मंत्री की भूमिका आबकारी नीति के निर्माण, लाइसेंस आवंटन और उससे जुटाए गए अवैध धन को ठिकाने लगाने में बेहद संदिग्ध पाई गई है।
नीति के पीछे का खेल: कैसे रचा गया अरबों का घोटाला
ईडी की शुरुआती जांच और चार्जशीट के मुताबिक, यह मामला सिर्फ प्रशासनिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार एक सुनियोजित वित्तीय अपराध से जुड़े हैं। आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान शराब बिक्री की आबकारी नीति में जानबूझकर ऐसे प्रावधान जोड़े गए, जिनसे चुनिंदा निजी सिंडिकेट और कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके। थोक और खुदरा शराब वितरण के लाइसेंस बांटने में तय नियमों को दरकिनार किया गया। इसके बदले में करोड़ों रुपये का 'कमीशन' और शेल कंपनियों के जरिए 'रिश्वत' वसूल कर काली कमाई को सफेद करने का खेल खेला गया।
धन का लेन-देन और शेल कंपनियों का ताना-बाना
मनी लॉन्ड्रिंग की परतें उधेड़ते हुए ईडी के हाथ कई ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जो नागेश्वर राव और उनके करीबियों से जुड़े बेनामी वित्तीय लेन-देन की ओर इशारा करते हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, शराब नीति से अर्जित अवैध राशि को कई फर्जी (शेल) कंपनियों के खातों में घुमाया गया और बाद में उसे अचल संपत्तियों और व्यावसायिक उपक्रमों में निवेश किया गया। ईडी ने कई महीनों तक बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल साक्ष्यों और संदिग्धों से पूछताछ के बाद यह ठोस सबूत जुटाए हैं, जिसके आधार पर पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी को अंजाम दिया गया।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर: राजनीतिक प्रतिशोध या निष्पक्ष जांच?
के. नागेश्वर राव की गिरफ्तारी के बाद राज्य में प्रचंड राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ दल ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जनता के पैसे को लूटने वालों का यही अंजाम होगा। दूसरी तरफ, वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने और चुनाव से पहले पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा है।
जांच की अगली आंच: क्या खुलेंगे कुछ और बड़े नाम?
पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी इस मामले का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत मानी जा रही है। ईडी द्वारा रिमांड की मांग के साथ ही नागेश्वर राव से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की तैयारी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि रिमांड के दौरान पूछताछ में कई नौकरशाहों, बिचौलियों और अन्य वरिष्ठ राजनेताओं के नाम भी सामने आ सकते हैं। इस नार्को-पॉलिटिकल-फाइनेंशियल नेक्सस की परतें जैसे-जैसे खुलेंगी, आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश की राजनीति में कई और बड़े धमाके देखने को मिल सकते हैं।