गुजरात के सूरत में पुलिस और नशीले पदार्थों के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों ने एक हाई-प्रोफाइल ड्रग्स स्मगलिंग रैकेट का पर्दाफाश करते हुए एक पूर्व केबिन क्रू (एयरहोस्टेस) को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला गुजरात से मुंबई 30 लाख रुपये मूल्य की मेफेड्रोन (MD) ड्रग्स की बड़ी खेप ले जाने की फिराक में थी। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर उसे रंगे हाथों दबोच लिया। कभी आसमान में यात्रियों की सेवा करने वाली इस पूर्व केबिन क्रू का यह नया रूप देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूरत पुलिस को सटीक इनपुट मिला था कि एक महिला स्मगलर लग्जरी कार के जरिए नशीले पदार्थों की एक बड़ी डिलीवरी लेकर मुंबई की ओर निकलने वाली है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने रणनीतिक रूप से नाकेबंदी की और संदिग्ध वाहन को घेर लिया। जब गाड़ी की तलाशी ली गई, तो उसमें से करीब 30 लाख रुपये मूल्य की एमडी (Mephedrone) ड्रग्स बरामद हुई। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी महिला पहले एक नामी एयरलाइन में केबिन क्रू के रूप में काम कर चुकी है और लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क से जुड़ी हुई थी।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी महिला अपने पुराने करियर के कारण मिलने वाली 'ग्लैमरस और पेशेवर छवि' का फायदा उठाकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रही थी। अमूमन सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान इस तरह के हाई-प्रोफाइल बैकग्राउंड वाले लोगों पर जल्दी नहीं जाता, जिसका इस्तेमाल यह रैकेट गुजरात और महाराष्ट्र के बीच ड्रग्स की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बनाए रखने के लिए कर रहा था। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि यह खेप सूरत में किसे सौंपी जानी थी और इसके पीछे मुख्य सरगना कौन है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर पिछले कुछ समय से नशीले पदार्थों के तस्करों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट रूट बनता जा रहा है। विमानन उद्योग (Aviation Industry) या कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े शिक्षित युवाओं का इस तरह के खतरनाक और अवैध धंधों में शामिल होना एक बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है। आसान और कम समय में मोटा पैसा कमाने की चाहत युवाओं को अपराध की इस अंधी सुरंग की ओर धकेल रही है, जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं बचता।
इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें तो सूरत पुलिस की यह सफलता नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस अभियान की एक बड़ी कामयाबी है। यह मामला साबित करता है कि ड्रग्स स्मगलिंग का नेटवर्क अब केवल पारंपरिक अपराधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पढ़ा-लिखा और ग्लैमरस वर्ग भी शामिल हो रहा है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को अपनी जांच का दायरा और तकनीक दोनों को अधिक व्यापक और सतर्क बनाना होगा, ताकि युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने वाले इस जहरीले सिंडिकेट की जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ा जा सके।