देश में तेज़ी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए गृह मंत्रालय ने 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' पर एक नया AI रिस्पांस फीचर लॉन्च किया है। यह कदम देशवासियों को डिजिटल ठगी से तुरंत राहत दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह नया एआई-आधारित सिस्टम शिकायत दर्ज होते ही स्वचालित रूप से हरकत में आ जाता है। यदि मामला वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है, तो यह सिस्टम तुरंत संबंधित बैंकों और यूपीआई गेटवे को अलर्ट भेजकर ठगी की गई रकम को संदिग्ध खातों (Mule Accounts) में ही होल्ड या फ्रीज करवा देता है, जिससे पैसे की निकासी रोकी जा सके।
इसके अलावा, यह सिस्टम डीपफेक, फर्जी कॉलिंग नंबरों और संदिग्ध आईपी एड्रेस का स्वचालित विश्लेषण करता है। डेटा पैटर्न के आधार पर यह एआई टूल देश भर में सक्रिय साइबर गिरोहों के नेटवर्क को ट्रैक करने और जांच एजेंसियों को सटीक इनपुट प्रदान करने में सक्षम है।
पोर्टल पर जोड़े गए चैटबॉट और वॉयस-असिस्टेंट से अब आम नागरिक अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में भी आसानी से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत दर्ज करने के साथ ही यूजर को एक रियल-टाइम ट्रैकिंग नंबर मिलेगा, जिससे वे अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति देख सकेंगे।
गृह मंत्रालय का यह डिजिटल नवाचार देश में साइबर सुरक्षा तंत्र को एक नया तकनीकी आधार प्रदान करता है। यह पहल न केवल साइबर अपराधियों के हौसले पस्त करेगी, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में आम नागरिकों के भरोसे और वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगी।