भारत ने अपने समुद्री संसाधनों की खोज और 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 12 सितंबर 2026 को भारत के केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में अत्याधुनिक अनुसंधान पोत ORV 'सागर मंथन' को देश सेवा में समर्पित किया गया। इसके साथ ही भारत के महत्वाकांक्षी 'डीप ओशन मिशन' (Deep Ocean Mission) को एक नई और अभूतपूर्व ऊर्जा मिली है।
भारत के पास लगभग 11,000 से 12,000 किलोमीटर लंबा विशाल समुद्री तट है, जो अमूल्य समुद्री खनिजों, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और जैविक संसाधनों से समृद्ध है। ORV सागर मंथन में भारत द्वारा ही स्वदेशी रूप से विकसित मरीन रोबोट्स और गहरे समुद्र में गोता लगाने में सक्षम सबमर्सिबल्स तैनात किए गए हैं, जो समुद्र की 6,000 मीटर से अधिक गहराई में जाकर अनुसंधान करने में सक्षम हैं।
इस मिशन का सबसे मुख्य उद्देश्य भारत को समुद्री अनुसंधान के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। अब तक गहरे समुद्र की मैपिंग और खनिज खोज के लिए देश को विदेशी तकनीकों और पोतों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन सागर मंथन के शामिल होने से भारतीय वैज्ञानिक अब हिंद महासागर के तलहटी (Sea Bed) का स्वतंत्र अध्ययन कर सकेंगे।
इसके अलावा, यह मिशन केवल खनिजों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) और जलवायु परिवर्तन के महासागरों पर पड़ रहे प्रभावों को समझने में भी मदद करेगा। महासागरीय धाराओं और गहरे समुद्र के जीवों का डेटा जुटाकर वैज्ञानिक भविष्य के पर्यावरणीय संकटों का बेहतर पूर्वानुमान लगा सकेंगे।
यह पहल भारत की आर्थिक और सामरिक क्षमता को बहुआयामी रूप से मजबूत करेगी। 'ब्लू इकोनॉमी' के माध्यम से भारत आने वाले दशकों में ऊर्जा, औषधि और उन्नत धातुओं के क्षेत्र में अग्रणी बनने का लक्ष्य रख रहा है, और ORV सागर मंथन इस वैज्ञानिक क्रांति की पहली मजबूत धुरी साबित होगा।