भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान ने 12 सितंबर 2026 को एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। देश ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी एचपीवी (Human Papillomavirus) टीकाकरण अभियान के तहत 80 लाख सफल खुराकों का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Healthcare) की एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी टीकाकरण अभियान में देश के पांच प्रमुख राज्यों ने अपने निर्धारित शत-प्रतिशत लक्ष्य को हासिल कर लिया है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश इस अभियान में सबसे आगे रहा, जहाँ 22 लाख से अधिक किशोरियों और महिलाओं को सुरक्षित रूप से टीका लगाया गया। जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के सुव्यवस्थित तंत्र ने इस सफलता को संभव बनाया।
सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं को प्रभावित करने वाले सबसे गंभीर कैंसरों में से एक रहा है। इस स्वदेशी और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराए गए टीकाकरण अभियान से आने वाली पीढ़ियों में इस जानलेवा बीमारी के मामलों में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी सुनिश्चित किया कि यह वैक्सीन दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक भी मुफ्त या अत्यधिक रियायती दरों पर उपलब्ध हो।
इस अभियान का दूसरा सकारात्मक पहलू समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना रहा है। सरकार द्वारा चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों के कारण ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में टीकों को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है। स्कूल-कॉलेजों और स्थानीय पंचायतों के सहयोग से टीकों का वितरण सुगम और त्वरित गति से पूरा किया गया।
वैश्विक स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों ने भारत के इस विशाल टीकाकरण मॉडल की सराहना की है। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में इतने कम समय में 80 लाख टीकाकरण का आंकड़ा पार करना यह दर्शाता है कि भारत अपने नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के प्रति कितना गंभीर और प्रतिबद्ध है।