केरल की एक विशेष विजिलेंस कोर्ट ने राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) तोमिन जे थचनकरी को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के 19 साल पुराने मामले में दोषी ठहराते हुए 4 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर ₹30.84 लाख का भारी जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद 1987 बैच के इस पूर्व आईपीएस अधिकारी को हिरासत में लेकर तिरुवनंतपुरम सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के अनुसार, थचनकरी ने 2003 से 2007 के बीच अपनी ज्ञात कानूनी आय के स्रोतों से लगभग 52 प्रतिशत (₹64.7 लाख) अधिक की चल-अचल संपत्ति अर्जित की थी। 2007 में दर्ज इस मामले की लंबी सुनवाई के दौरान 96 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और सैकड़ों दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए गए।
यह केरल के न्यायिक इतिहास में पहला मौका है जब पुलिस महानिदेशक (DGP) रैंक के किसी शीर्ष आईपीएस अधिकारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत जेल की सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों से पूर्ण सत्यनिष्ठा की अपेक्षा की जाती है और सार्वजनिक पद का उपयोग निजी संपत्ति बढ़ाने के लिए करना गंभीर अपराध है।
बचाव पक्ष ने थचनकरी की ढलती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ा रुख अपनाना समाज में एक सख्त संदेश देने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पूर्व DGP ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संपत्तियां पारिवारिक बंटवारे और वैध उपहारों से प्राप्त हुई थीं। इस फैसले ने केरल के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोपी पूर्व अधिकारी के वकीलों का कहना है कि वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।