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रूस-यूक्रेन युद्ध: सैकड़ों ड्रोन हमलों के बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है। रूस की ओर से यूक्रेन के विभिन्न शहरों, विशेषकर राजधानी कीव, खारकीव और ओडेसा के ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर सैकड़ों ईरानी निर्मित 'शाहेद' ड्रोनों और क्रूज़ मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
19 Sep 2026
Solar farm during sunset

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है। रूस की ओर से यूक्रेन के विभिन्न शहरों, विशेषकर राजधानी कीव, खारकीव और ओडेसा के ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर सैकड़ों ईरानी निर्मित 'शाहेद' ड्रोनों और क्रूज़ मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं। इन हमलों के कारण यूक्रेन के कई बड़े हिस्सों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे भीषण ठंड और जल संकट का खतरा पैदा हो गया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इन हमलों को नागरिक आबादी को आतंकित करने की रूस की हताशापूर्ण कोशिश करार दिया है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों ने अधिकांश ड्रोनों को मार गिराया, लेकिन कई मिसाइलों ने बिजली संयंत्रों और सब-स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ज़ेलेंस्की ने पश्चिमी देशों और नाटो सहयोगियों से तत्काल प्रभाव से अधिक उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों (जैसे पैट्रियट मिसाइल) और गोला-बारूद की आपूर्ति बढ़ाने की गुहार लगाई है।

जवाबी कार्रवाई करते हुए यूक्रेन ने भी रूसी सीमा के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों, डिपो और सैन्य हवाई अड्डों पर लंबी दूरी के स्वदेशी ड्रोनों से हमले तेज कर दिए हैं। रूस के बेलगोरोद और कुर्स्क क्षेत्रों में कई ईंधन डिपो में आग लगने की खबरें आई हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उन्होंने यूक्रेनी ड्रोनों को समय रहते हवा में ही नष्ट कर दिया, हालांकि कुछ इलाकों में नागरिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बढ़ते हमलों और मानवीय संकट पर विचार करने के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में पश्चिमी देशों ने रूस के कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए उस पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए, जबकि रूस ने तर्क दिया कि वह केवल उन ढांचों को निशाना बना रहा है जो यूक्रेनी सेना को सहायता प्रदान करते हैं। दोनों पक्षों के अड़ियल रुख के कारण किसी भी शांति वार्ता की संभावना फिलहाल धूमिल नजर आ रही है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि सर्दियों के करीब आते ही दोनों देश एक-दूसरे के आर्थिक और ऊर्जा संसाधनों को नष्ट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस युद्ध के कारण न केवल पूरे यूरोप में सुरक्षा और आर्थिक संकट मंडरा रहा है, बल्कि खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है।