राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में सीएनजी चालित वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध या एक्सपायर्ड सीएनजी सिलेंडरों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए एक क्रांतिकारी पहल शुरू की जा रही है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने संयुक्त रूप से सभी सीएनजी स्टेशनों पर ऑटोमेटेड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे और हाइड्रो-टेस्टिंग वेरिफिकेशन सिस्टम लगाने का निर्णय लिया है।
वर्तमान में कई वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने वाहनों में अनाधिकृत सीएनजी किट या ऐसे सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं जिनकी अनिवार्य हाइड्रो-टेस्टिंग (सत्यापन) की समयावधि समाप्त हो चुकी होती है। एक्सपायर्ड सीएनजी सिलेंडर गैस भरवाते समय अत्यधिक दबाव के कारण अक्सर फट जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे और जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस मानवीय भूल और जालसाजी को रोकने के लिए एआई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
इस नई प्रणाली के तहत, जैसे ही कोई वाहन सीएनजी पंप पर ईंधन भरवाने के लिए पहुंचेगा, एआई कैमरे तुरंत वाहन की नंबर प्लेट और विंडशील्ड पर लगे डिजिटल 'हाइड्रो-टेस्टिंग आरएफआईडी टैग' (RFID Tag) को स्कैन कर लेंगे। यदि वाहन के सिलेंडर की टेस्टिंग की तारीख निकल चुकी होगी या किट अवैध पाई जाएगी, तो पंप का ऑटोमैटिक डिस्पेंसिंग सिस्टम लॉक हो जाएगा और सीएनजी मशीन से गैस की आपूर्ति अपने आप रुक जाएगी।
यह स्वचालित प्रणाली सीएनजी पंप कर्मियों पर से सत्यापन का दबाव हटा देगी और किसी भी प्रकार की मानवीय मिलीभगत या जबरदस्ती गैस भरवाने की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देगी। इसके साथ ही, वाहन मालिकों को उनके मोबाइल पर ऑटोमेटेड अलर्ट भेजा जाएगा कि वे समय रहते अधिकृत केंद्रों से अपने सीएनजी सिलेंडर की जांच करवाएं और नया सुरक्षा प्रमाण पत्र प्राप्त करें।
दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में सीएनजी वाहनों की भूमिका बहुत बड़ी है। एआई-संचालित यह नई तकनीक न केवल दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दौड़ने वाले लाखों सीएनजी वाहनों को हादसों से सुरक्षित बनाएगी, बल्कि यह दर्शाती है कि नागरिक सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का व्यावहारिक उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।